पटना में खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर हुए बवाल और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद एकाएक सुर्खियों में आ गए हैं। एक छोटे से गांव से निकले रौशन ने कभी आर्थिक तंगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की नाकामियों के बीच अपना करियर खड़ा किया था, लेकिन हार नहीं मानी।
पुलिस ने किसे-किसे लिया हिरासत में?
पटना में खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर हुए हंगामे, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद को हिरासत में ले लिया है। उनके साथ दो अन्य सहयोगियों अभिषेक और गौरव को भी हिरासत में लिया गया है।
पुलिस के अनुसार यह घटना कदमकुआं थाना क्षेत्र में स्थित खान ग्लोबल स्टूडियो के बाहर हुई, जहां कुछ लोगों ने ईंट-पत्थर फेंककर तोड़फोड़ की। जांच के दौरान पुलिस ने ज्ञान बिंदु कोचिंग से जुड़े लोगों की पहचान करते हुए कार्रवाई शुरू की।
सहरसा के धमसेना गांव से नाता
रौशन आनंद का जन्म बिहार के सहरसा जिले के धमसेना गांव में हुआ था। उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा रहा है और आर्थिक रूप से बहुत संपन्न नहीं था। बचपन से ही उन्होंने सीमित संसाधनों में पढ़ाई की और उनकी शुरुआती शिक्षा सरकारी स्कूलों में हुई, जहां सामान्य माहौल में रहते हुए उन्होंने आगे बढ़ने का सपना संजोया।
बताया जाता है कि बचपन से ही रौशन अपने फैसले खुद लेने की कोशिश करते थे। पढ़ाई को लेकर उनका नजरिया औरों से अलग था और यही कारण रहा कि कम उम्र में ही उन्होंने अपने भविष्य से जुड़े बड़े निर्णय लेने शुरू कर दिए।
15 की उम्र में घर छोड़ पटना का रुख
उनके जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब करीब 15 साल की उम्र में वे पढ़ाई और करियर की तलाश में घर छोड़कर पटना आ गए। यहां उन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।
इसके बाद वे कोटा भी पहुंचे, जहां देशभर के छात्रों की तरह उन्होंने इंजीनियरिंग की तैयारी की। मेहनत रंग लाई और AIEEE परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन के दम पर उन्हें BIT मेसरा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला मिल गया। हालांकि आर्थिक हालात और दूसरी चुनौतियों के चलते इंजीनियर बनने का उनका सपना अधूरा रह गया और बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
कई परीक्षाएं दीं, पर सफलता दूर रही
इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ने के बाद रौशन आनंद ने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने बिहार पुलिस, BPSC और UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया। वर्ष 2014 में बिहार पुलिस की लिखित परीक्षा तो उन्होंने पास कर ली, लेकिन फिजिकल टेस्ट में सफल नहीं हो पाए।
इसके अलावा बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, मगर अंतिम चयन सूची में अपनी जगह नहीं बना सके। लगातार असफलताओं के बाद भी उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी।
फीस के बदले खाना लेकर शुरू किया पढ़ाना
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान ही रौशन ने छात्रों को पढ़ाना शुरू कर दिया था। शुरुआती दौर में संसाधनों की भारी कमी थी। कहा जाता है कि कई बार वे छात्रों को पढ़ाने के बदले फीस के बजाय खाना तक स्वीकार कर लेते थे।
यहीं से उन्हें यह अहसास हुआ कि पढ़ाना ही उनका असली क्षेत्र हो सकता है। धीरे-धीरे टीचिंग उनका पेशा बन गई और वे छात्रों के बीच लोकप्रिय होने लगे।
सिर्फ चार छात्रों से शुरू हुई अकादमी
रौशन आनंद ने 1 सितंबर 2017 को ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी की नींव रखी। शुरुआत बेहद मामूली थी और उनके पास सिर्फ चार छात्र थे, लेकिन पढ़ाने के तरीके और प्रतियोगी परीक्षाओं की गहरी समझ के चलते छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
आज ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी बिहार के नामी कोचिंग संस्थानों में गिनी जाती है। यह संस्थान खास तौर पर बिहार पुलिस, SSC, रेलवे, बैंकिंग और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जाना जाता है।
अब विवाद के कारण चर्चा में
अब तक शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पहचाने जाने वाले रौशन आनंद का नाम पटना के खान सर कोचिंग विवाद के बाद चर्चा में है। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पड़ताल के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल रौशन आनंद की पहचान बिहार के एक ऐसे शिक्षक के रूप में रही है, जिन्होंने संघर्षों से निकलकर अपना शिक्षण संस्थान खड़ा किया और हजारों छात्रों तक अपनी पहुंच बनाई। हालांकि मौजूदा विवाद के बाद उनकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और मामले की पूरी सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगी।
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