मानसून की दस्तक जहां लोगों को भीषण और तपती गर्मी से बड़ी राहत दिलाती है, वहीं यह मौसम अपने साथ कई तरह की चुनौतियां और गंभीर खतरे भी लेकर आता है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी सहित देश के तमाम ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बारिश शुरू होते ही एक बड़ी समस्या सामने आने लगती है, और वह है सांपों का रिहायशी इलाकों में निकलना। इस मौसम में सांप काटने (स्नेक बाइट) की घटनाओं में अचानक बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। खेतों में पानी भरने से लेकर सुरक्षित आशियाने की तलाश तक, कई ऐसे कारण हैं जो इन जहरीले जीवों को इंसानी बस्तियों की ओर आने पर मजबूर कर देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह संकट और भी गहरा हो जाता है, क्योंकि वहां लोग खेती-बाड़ी और पशुपालन जैसी गतिविधियों के कारण खेतों में काफी समय बिताते हैं।
बरसात के दिनों में आखिर क्यों बढ़ जाता है सांपों का खतरा?
बरसात के मौसम में सांपों के बाहर निकलने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण उनके प्राकृतिक आशियाने का उजड़ जाना है। लगातार होने वाली तेज बारिश के कारण जमीन के भीतर बने सांपों के बिल पानी से पूरी तरह भर जाते हैं। दम घुटने और असुरक्षा के कारण ये जीव मजबूरन अपने सुरक्षित ठिकानों को छोड़कर बाहर निकलते हैं और किसी सूखी तथा सुरक्षित जगह की तलाश करने लगते हैं। इस खोज में वे अक्सर इंसानी बस्तियों, घरों, अनाज के गोदामों, लकड़ी के ढेरों, भूसे या घास-फूस की कतरनों और पशुशालाओं में जाकर छिप जाते हैं।
इसके अलावा, मानसून के समय प्रकृति में एक और बड़ा बदलाव आता है। इस मौसम में मेंढक, चूहे, कीड़े-मकोड़े और अन्य छोटे जीव-जंतुओं की आबादी तेजी से बढ़ती है। चूंकि ये जीव सांपों का मुख्य भोजन हैं, इसलिए भोजन की प्रचुरता के कारण भी सांप इनके पीछे-पीछे इंसानी घरों और उनके आसपास के खेतों तक पहुंच जाते हैं। जब इंसानों और इन जीवों का आमना-सामना होता है, तो आत्मरक्षा में सांप इंसानों पर हमला कर देते हैं।
बचाव के लिए विशेषज्ञ की क्या है सलाह?
इस गंभीर खतरे से निपटने और सुरक्षित रहने के लिए विशेषज्ञ कुंज बिहारी ने बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक उपाय साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में सांपों के सक्रिय होने की संभावना सबसे अधिक होती है, इसलिए लोगों को अपने दैनिक जीवन में कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए।
- रात में टॉर्च का अनिवार्य उपयोग: यदि आप रात के समय या अंधेरे में बिस्तर से नीचे उतर रहे हैं, तो सबसे पहले अपने आसपास के फर्श को टॉर्च की रोशनी से अच्छी तरह जांच लें। कई बार सांप फर्श पर या बिस्तर के ठीक नीचे अंधेरे में बैठे होते हैं और अनजाने में उन पर पैर पड़ जाने से वे तुरंत काट लेते हैं।
- आसपास की नियमित सफाई: अपने घरों के आसपास अनावश्यक रूप से उगी झाड़ियों, कचरे के ढेरों, पुरानी लकड़ियों या भूसे के संचय को तुरंत साफ करें। ये स्थान सांपों के छिपने के लिए सबसे अनुकूल ठिकाने साबित होते हैं।
- जूते और चप्पल पहनकर ही बाहर निकलें: खेतों में काम करते समय या रात में बाहर जाते समय बंद जूते और मोटे कपड़े पहनना बेहद सुरक्षित रहता है।
सांप काटने पर तुरंत क्या करें और किन गलतियों से बचें?
यदि तमाम सावधानियों के बावजूद किसी व्यक्ति को सांप काट लेता है, तो घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लेना चाहिए। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि सांप काटने के बाद कीमती समय को अंधविश्वासों में नष्ट नहीं करना चाहिए।
- शांति बनाए रखें और हलचल कम करें: पीड़ित व्यक्ति को शांत रखने की कोशिश करें। जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे बिल्कुल भी न हिलाएं-डुलाएं। शरीर में हलचल होने से रक्त का प्रवाह तेज होता है, जिससे जहर तेजी से पूरे शरीर में फैल सकता है।
- अंधविश्वास और झाड़-फूंक से रहें दूर: ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग सांप काटने पर सबसे पहले ओझा-गुणी या झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। इसके अलावा, घाव पर चीरा लगाना, मुंह से जहर चूसना या किसी भी प्रकार का घरेलू लेप लगाना बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है।
- तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें: सांप काटने का एकमात्र और सबसे असरदार इलाज अस्पताल में उपलब्ध एंटी-स्नेक वेनम (ASV) का टीका है। समय रहते अस्पताल पहुंचने से मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है।
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