मध्य प्रदेश की राजनीति: स्मार्ट मीटर से लेकर राम मंदिर चंदा घोटाले तक, पीसी शर्मा ने सरकार को घेरा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए निर्मला सप्रे की सदस्यता, कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के कई गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।

निर्मला सप्रे की सदस्यता पर मांगा त्वरित निर्णय

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश सरकार के कामकाज पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए शर्मा ने कहा कि निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता के मामले में अब और अधिक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट ने इस मामले पर फैसला लेने का अधिकार पूरी तरह से विधानसभा अध्यक्ष के विवेक पर छोड़ दिया है। शर्मा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और राज्य सरकार इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालत के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य रखे गए थे, जिनसे यह साबित होता है कि निर्मला सप्रे भाजपा की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। शर्मा का दावा है कि नैतिकता के आधार पर उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जानी चाहिए और रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जाना चाहिए, जिससे जनता का फैसला स्पष्ट हो सके।

बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सवाल

मोहर्रम जुलूस के दौरान हाल ही में हुई हिंसा और झड़पों की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए पीसी शर्मा ने प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। पीसी शर्मा ने पुलिस विभाग को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि पुलिस की प्राथमिकता केवल चालान काटने और राजस्व जुटाने तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस समय रहते सतर्कता बरतती और सख्त कदम उठाए जाते, तो मोहर्रम के दौरान हुई अप्रिय घटनाओं को रोका जा सकता था।

संगठनात्मक असंतोष और बिजली बिल का मुद्दा

कांग्रेस पार्टी की जिला कार्यकारिणी की नई घोषणा को लेकर भी पीसी शर्मा ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि नई टीम के गठन में पार्टी के उन पुराने और समर्पित जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है, जिन्होंने हमेशा संगठन को मजबूती दी है। इस फैसले से कार्यकर्ताओं में काफी मायूसी है और उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस पर पुनर्विचार करेगा। बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर हमला बोलते हुए शर्मा ने कहा कि आम जनता पर स्मार्ट मीटर और भारी-भरकम बिल का बोझ डाला जा रहा है, जबकि कई सरकारी विभागों के बिल ही लंबे समय से लंबित पड़े हैं। उन्होंने इसे एक तरह का भ्रष्टाचार करार दिया।

राम मंदिर चंदा मामले में आक्रोश

राम मंदिर निर्माण हेतु एकत्रित किए गए चंदे में हुई धोखाधड़ी और इस मामले में हुई गिरफ्तारियों पर भी पीसी शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिन श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के साथ मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था, उनकी भावनाओं को इस घोटाले से गहरा आघात पहुंचा है। शर्मा ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में काफी विलंब हुआ है, जो पहले ही हो जानी चाहिए थी। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदेश की जनता इन सभी मुद्दों का जवाब आने वाले चुनावों में देगी और सरकार को केवल कानून का पालन ही नहीं, बल्कि न्याय भी सुनिश्चित करना होगा।

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