मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन में बड़ा फर्जीवाड़ा
मध्य प्रदेश के भिंड जिले से सरकारी गेहूं खरीद प्रक्रिया में एक हैरान कर देने वाला घोटाला सामने आया है। सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें उनकी फसल का सही मूल्य दिलाने के लिए संचालित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ लोगों ने फर्जीवाड़े का सहारा लिया। प्रशासन की ओर से की गई प्रारंभिक जांच के बाद दूसरों की जमीन पर पंजीकरण करवाकर फसल बेचने वाले चार किसानों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जिन लोगों पर यह कार्रवाई हुई है, उनमें तीन महिलाएं शामिल हैं। लहार थाना पुलिस ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं और एफआईआर का दायरा बढ़ सकता है।
फर्जी तरीके से कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम
भिंड में सामने आए इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दरअसल, कई किसान तकनीकी जानकारी के अभाव में अपना ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा पाते, जिसका फायदा उठाकर किसान माफिया सक्रिय हो जाते हैं। भिंड के कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना को जब गेहूं उपार्जन में फर्जी पंजीयन की शिकायतें मिलीं, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए लहार एसडीएम और कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार मुद्गल को तत्काल जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान खाद्य विभाग की सूची का मिलान जब राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से किया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई किसानों ने ऐसी जमीनों के खसरों पर अपना नाम दर्ज करवा लिया था जो वास्तव में उनकी थी ही नहीं। गंभीर बात यह है कि इन फर्जी दस्तावेजों का संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन भी कर दिया गया था, जो बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।
चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
जांच टीम की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि जिन सर्वे नंबरों का उपयोग आरोपियों ने पंजीयन के लिए किया था, उनमें उनका नाम भूमिस्वामी के रूप में कहीं भी दर्ज नहीं था। इसके अलावा, जमीन के वास्तविक मालिकों से न तो कोई सहमति ली गई थी और न ही बटाई या खेती से संबंधित कोई कानूनी अनुबंध पेश किया गया था। इस धांधली में लिधौरा गांव की संचिता पाठक, लालपुरा निवासी गिरिजा, प्रतीक्षा और वीर सिंह तोमर के पंजीकरण संदिग्ध पाए गए। अनियमितताएं पूरी तरह पुष्ट होने के बाद प्रशासन ने पुलिस को कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं, मुख्य रूप से धारा 420 और 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस की कार्रवाई और विस्तृत जांच
एसडीओपी रविंद्र वास्कले ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि घोटाले की परतें खुल रही हैं। आरोपी संचिता पाठक ने जैतपुरा समिति के माध्यम से अलग-अलग गांवों के 18 खसरों को जोड़कर खुद को किसान बताकर पंजीयन करवाया। वहीं, गिरिजा और प्रतीक्षा ने लालपुरा गांव की जमीन का सहारा लेकर निवसाई समिति में रजिस्ट्रेशन कराया। चौथे आरोपी वीर सिंह तोमर ने दबोह, टोला और बरेई गांव के पांच सर्वे नंबरों का गलत इस्तेमाल किया। इन सभी का एकमात्र उद्देश्य सरकारी खरीद केंद्रों पर अवैध तरीके से गेहूं खपाकर अनुचित आर्थिक लाभ कमाना था। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और मामले की गहराई से जांच के बाद इस बड़े आर्थिक अपराध के पीछे के मास्टरमाइंडों की पहचान की जाएगी। जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि सरकारी खजाने को चूना लगाने वालों पर लगाम लगाई जा सके।
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