जालौर में मुहर्रम का खास मिर्ची बड़ा: साल में सिर्फ एक दिन मिलता है यह स्वाद, देखते ही देखते बिक जाते हैं हजारों पीस

राजस्थान के जालौर में मुहर्रम के मौके पर बनने वाला 'वसनो बा का मिर्ची बड़ा' अपनी अनोखी रेसिपी और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। लोग सालभर इस खास पकवान का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

परंपरा और स्वाद का अनूठा संगम

राजस्थान के जालौर शहर में मुहर्रम के दौरान एक बेहद खास परंपरा निभाई जाती है। यहां के गणेश चौक इलाके में स्थित गुर्जरों के वास में हर साल मुहर्रम पर एक खास किस्म का मिर्ची बड़ा तैयार किया जाता है, जिसे 'वसनो बा का मिर्ची बड़ा' के नाम से जाना जाता है। इस व्यंजन की खासियत यह है कि यह पूरे साल में सिर्फ मुहर्रम के एक दिन ही बनाया जाता है।

क्यों खास है यह मिर्ची बड़ा

सामान्य मिर्ची बड़ों से अलग इसका स्वाद हल्का मीठा होता है। सोहन सिंह गुर्जर, जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, बताते हैं कि इसमें एक गुप्त सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, जो मिर्च के तीखेपन को संतुलित कर एक अनोखा स्वाद देती है। यह पकवान न केवल स्वाद के लिए, बल्कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

18 से 20 साल पुरानी विरासत

यह परंपरा करीब 18 से 20 साल पुरानी है। सोहन सिंह गुर्जर के अनुसार, यह काम पहले उनके पिताजी किया करते थे, जिनके नाम पर ही यह मिर्ची बड़ा मशहूर है। आज भी इसे उसी श्रद्धा और पुरानी विधि से बनाया जाता है। लोग इस स्वाद के इतने दीवाने हैं कि वे हर साल 365 दिन इस खास दिन का इंतजार करते हैं।

तैयारी और बिक्री

  • तैयारियों की शुरुआत सुबह करीब 6 बजे से ही हो जाती है।
  • शाम को 6 बजे बिक्री शुरू होते ही ग्राहकों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
  • एक दिन में करीब 3 से 4 हजार मिर्ची बड़े तैयार किए जाते हैं।
  • कुछ ही घंटों के भीतर सारा स्टॉक खत्म हो जाता है।

महंगाई के दौर में इस मिर्ची बड़े की कीमत में भी बदलाव आया है। कभी 10 रुपये में मिलने वाला यह मिर्ची बड़ा अब 30 रुपये प्रति पीस की दर से बिकता है। हालांकि, कीमत बढ़ने के बाद भी ग्राहकों के उत्साह और इस मिर्ची बड़े की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है।

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