इंटीग्रेटेड फार्मिंग का अनोखा मॉडल
झारखंड पशुपालन विभाग ने एक ऐसा खेती मॉडल तैयार किया है, जो कम जमीन वाले किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है। जिन किसानों के पास कम से कम 1 एकड़ जमीन है, वे इस मॉडल को अपनाकर अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। इस एकीकृत खेती प्रणाली में पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन का तालमेल बिठाया गया है।
क्या-क्या कर सकते हैं किसान
इस मॉडल के तहत किसान एक ही जगह पर कई तरह के काम एक साथ कर सकते हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- पशुपालन: बकरी, मुर्गी, बत्तख और मछली पालन।
- सब्जी और फल: बैंगन, टमाटर, आलू, भिंडी, अमरूद, पपीता और कटहल जैसी फसलों की खेती।
- अन्य: मशरूम का उत्पादन भी किया जा सकता है।
मुफ्त ट्रेनिंग और भारी सब्सिडी
कृषि विभाग की ओर से किसानों को इस मॉडल को समझने के लिए 4 दिनों की निशुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है। किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर इसके बारे में विस्तार से जानकारी ले सकते हैं। इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि सोलर पैनल, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और बीजों की खरीद पर सरकार 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है।
सिंचाई की समस्या का समाधान
कृषि पदाधिकारी ओपी गुप्ता के अनुसार, इस मॉडल को अपनाने से किसानों को बिजली बिल की चिंता से मुक्ति मिलेगी। ड्रिप इरिगेशन के जरिए पानी की बचत होती है और सोलर पंप से मोटर चलाने पर बिजली का खर्च नहीं आता। सब्सिडी के बाद सोलर पंप मात्र 6,000 रुपये की लागत में मिल जाता है, जिससे सिंचाई की बड़ी समस्या खत्म हो जाती है। इसके अलावा, पशुओं से निकलने वाला वेस्ट खेत के लिए खाद का काम करता है, जिससे लागत कम और उत्पादन बेहतर होता है।
विविधता से बढ़ेगा मुनाफा
इस फार्मिंग मॉडल में खेत को अलग-अलग क्यारियों में बांटा जाता है। इससे एक ही खेत में अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं, जिससे बाजार की मांग के अनुसार किसानों के पास हमेशा उत्पाद उपलब्ध रहते हैं। इस विविधता के कारण किसान किसी एक फसल या बाजार पर निर्भर नहीं रहते, जिससे आर्थिक जोखिम भी कम हो जाता है।
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