मध्य प्रदेश में मानसून की 11 दिन की देरी, अलनीनो का खतरा और किसानों के लिए जरूरी सलाह

मध्य प्रदेश में मानसून अपने तय समय से 11 दिन पीछे चल रहा है, जिससे कृषि कार्यों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों ने अलनीनो के प्रभाव से इस वर्ष औसत से कम बारिश होने की चेतावनी दी है।

मानसून में देरी और अलनीनो का संकट

मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार लंबा होता जा रहा है। जून महीने के 24 दिन बीत जाने के बाद भी मानसून की सक्रियता पूरी तरह से नहीं बन पाई है। इस साल मानसून अपने निर्धारित समय से लगभग 11 दिन देरी से चल रहा है। मौसम विभाग और केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस बार अलनीनो के कारण सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है। सागर कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव के अनुसार, प्रशांत महासागर में समुद्र के बीच का पानी गर्म होने से मानसून के चक्र पर सीधा असर पड़ता है, जिससे भारत में वर्षा कम होने की आशंका बनी रहती है।

खेती और फसलों पर पड़ेगा बुरा प्रभाव

बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 60 से 70 प्रतिशत किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर हैं। आमतौर पर मानसून 15 जून से 21 जून के बीच आ जाता है, लेकिन देरी के कारण खरीफ की फसलों का पूरा चक्र बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके कारण बुवाई में देरी होगी और फसलों में सूखे का असर दिख सकता है। बीच-बीच में लंबे समय तक बारिश न होने से फसलों के परागण और फलियों के विकास पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे कीटों का प्रकोप भी बढ़ सकता है। यदि खरीफ का सीजन प्रभावित होता है, तो इसका सीधा असर बाद में रबी की फसलों पर भी पड़ेगा।

किसानों के लिए जरूरी सावधानियां

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे बुवाई के मामले में जल्दबाजी न करें। जब खेत में 75 से 100 एमएम तक बारिश हो जाए, तभी बुवाई शुरू करें। किसानों के लिए कुछ खास सुझाव हैं:

  • कम अवधि वाली फसलों का चयन करें।
  • सोयाबीन की बुवाई 10 जुलाई तक पूरी कर लें और केवल 90 दिन वाली किस्मों का उपयोग करें।
  • बीज उपचार अवश्य करें और पीएसबी व राइबोजोरियम कल्चर का उपयोग करें।
  • देरी की स्थिति में 80 से 85 दिन वाली फसलों को प्राथमिकता दें।

बारिश का गणित और प्रभावित जिले

सागर मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक विवेक छलोत्रे के मुताबिक, सागर में मानसून के 4 महीने के दौरान औसतन 1230 एमएम बारिश होती है। 10 प्रतिशत की कमी के चलते इस बार लगभग 130 एमएम बारिश कम होने की संभावना है। अलनीनो के खतरे वाले जिलों में धार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा और खंडवा शामिल हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की सटीक जानकारी के लिए दामिनी और मेघदूत जैसे मोबाइल ऐप का सहारा लें।

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