सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी
बिहार के अरवल जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं। अरवल के वंशी प्रखंड अंतर्गत आने वाले दनियाला गांव के निवासी रजनीश राज ने अपनी मेहनत और अटूट लगन से न केवल अपना करियर संवारा, बल्कि अपने पूरे खानदान की तस्वीर बदल दी है। रजनीश ने NEET जैसी कठिन परीक्षा को दूसरे प्रयास में उत्तीर्ण कर एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। वर्तमान में वह मधेपुरा स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS का अध्ययन कर रहे हैं और वे अपने परिवार की पहली ऐसी पीढ़ी हैं, जिससे कोई डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ा है।
शुरुआती दौर और संघर्ष
रजनीश के लिए यह राह आसान नहीं थी। एक छोटे से गांव और सीमित साधनों के बीच पले-बढ़े रजनीश के मन में डॉक्टर बनने का जो बीज अंकुरित हुआ था, उसे सींचने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने पहली बार जब NEET की परीक्षा दी, तो उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने असफलता को अपनी हार नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों से सीख ली और पहले से अधिक ऊर्जा के साथ दोबारा तैयारी शुरू की। उनकी यह मेहनत रंग लाई और वर्ष 2025 में उन्होंने सफलता हासिल की, जिसके बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया। अब उनका पहला शैक्षणिक वर्ष पूरा हो चुका है और वह अपने डॉक्टर बनने के लक्ष्य के काफी करीब हैं।
जहानाबाद में की पढ़ाई और रणनीति
अपनी तैयारी के सफर के बारे में बात करते हुए रजनीश बताते हैं कि 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने बेहतर मार्गदर्शन और वातावरण की तलाश में जहानाबाद का रुख किया। उन्होंने सुना था कि जहानाबाद से कई छात्र नीट की परीक्षा में परचम लहरा चुके हैं। उन्होंने वहां एक कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया, लेकिन उन्होंने कोचिंग पर ही पूरी तरह निर्भर रहने की गलती नहीं की। रजनीश ने कोचिंग के अलावा प्रतिदिन करीब पांच घंटे सेल्फ स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया। उनका स्पष्ट मानना है कि कोचिंग संस्थान केवल दिशा दे सकते हैं, लेकिन सफलता का मुख्य आधार स्वयं की गई नियमित पढ़ाई और कठिन अभ्यास ही है।
NEET की तैयारी के लिए खास सुझाव
आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए रजनीश ने कई महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए हैं। उनका कहना है कि जो विद्यार्थी भविष्य में चिकित्सक बनने का सपना देखते हैं, उन्हें 10वीं कक्षा के बाद से ही अपनी तैयारी की नींव रख देनी चाहिए। उन्होंने NCERT की किताबों को तैयारी का आधार स्तंभ बताया है। रजनीश के अनुसार, छात्रों को एक ही पाठ्यक्रम को बार-बार दोहराना चाहिए और निरंतर अभ्यास करना चाहिए। इसके अलावा, जीव विज्ञान यानी बायोलॉजी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है, क्योंकि नीट में आधे से अधिक प्रश्न इसी विषय से आते हैं। यदि इस विषय पर छात्र की पकड़ मजबूत हो जाए, तो सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कॉलेज लाइफ और सरकारी संस्थानों का महत्व
रजनीश ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि नीट परीक्षा को पास करना ही सबसे बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि एक बार मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल जाने के बाद पढ़ाई की राह तुलनात्मक रूप से व्यवस्थित हो जाती है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, जिनमें रहने, अध्ययन सामग्री और अन्य बुनियादी जरूरतें शामिल हैं। इसके साथ ही, निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में सरकारी संस्थानों की फीस भी काफी कम होती है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवार के छात्रों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
सेवा भाव और भविष्य की राह
अपने खानदान के पहले डॉक्टर के रूप में अपनी भूमिका को लेकर रजनीश बहुत भावुक और उत्साहित हैं। उनका कहना है कि वे इस पेशे को केवल करियर के रूप में नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के अवसर के रूप में देखते हैं। वह मानते हैं कि डॉक्टर को ईश्वर का दूसरा रूप माना जाता है, इसलिए इस पेशे में सेवा और ईमानदारी की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए और असफलता से कभी घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सबक लेकर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सफर का पहला कदम उठाना सबसे कठिन होता है, लेकिन एक बार आगे बढ़ने का साहस जुट जाए, तो मंजिल तक पहुंचना मुमकिन हो जाता है।
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