मुद्दा किसी का, सुर्खियां राहुल की! सार्थक सिद्धांत से मुलाकात पर फिर गरमाई 'फोटो-ऑप' की बहस

CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में गड़बड़ी उजागर करने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत से राहुल गांधी की मुलाकात के बाद उनकी कार्यशैली पर नया विवाद खड़ा हो गया है। आलोचक इसे 'उधार की राजनीति' बता रहे हैं तो कांग्रेस इसे जनता से जुड़ाव करार दे रही है।

CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित खामियों को सामने लाने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत से राहुल गांधी की मुलाकात ने एक बार फिर उनकी राजनीतिक शैली को बहस के केंद्र में ला दिया है। इस मुलाकात के बाद विरोधी और समर्थक दोनों ही अपने-अपने तर्कों के साथ आमने-सामने हैं।

'उधार की राजनीति' का आरोप

आलोचकों का कहना है कि राहुल गांधी हर उस शख्स तक पहुंच जाते हैं, जो पहले से किसी मुद्दे को लेकर सुर्खियों में रहा हो। उनके मुताबिक इसमें मुद्दा भले किसी और का हो, लेकिन उसका राजनीतिक लाभ राहुल गांधी अपने खाते में जोड़ लेते हैं। यही वजह है कि उनकी ऐसी मुलाकातों को 'उधार की राजनीति' कहकर निशाने पर लिया जा रहा है।

आम लोगों से मुलाकातों का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी की किसी से भेंट चर्चा का विषय बनी हो। इससे पहले ऑटो चालकों, मोचियों, किसानों, कुलियों और मजदूरों के साथ उनकी बातचीत के वीडियो और तस्वीरें कई बार सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो चुकी हैं। ऐसी हर मुलाकात के साथ उनके इरादों को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।

कांग्रेस और विरोधियों के अलग-अलग दावे

कांग्रेस इन मुलाकातों को आम जनता से सीधे जुड़ने की राजनीति के रूप में पेश करती है। पार्टी का मानना है कि इससे आम आदमी की समस्याएं राष्ट्रीय मंच तक पहुंचती हैं। वहीं विरोधी इसे महज 'फोटो-ऑप' यानी तस्वीरें खिंचवाने का जरिया बताकर खारिज करते हैं।

असली सवाल कायम

इस पूरी बहस के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या ये मुलाकातें सचमुच किसी ठोस बदलाव का रास्ता बनाती हैं, या फिर ये केवल राजनीतिक रूप से चर्चा में बने रहने का माध्यम भर हैं।

https://hindi.news18.com/news/nation/rahul-gandhi-photo-op-politics-sarthak-siddhant-meeting-10538107.html