गलत तरीके से बर्बाद हो रही खाद
खेती को समृद्ध बनाने के लिए गोबर की खाद सबसे उत्तम मानी जाती है, लेकिन कई बार किसानों की एक छोटी सी चूक इसकी पूरी गुणवत्ता को खत्म कर देती है। अक्सर देखा जाता है कि किसान दोपहर की चिलचिलाती धूप में ही खेतों में खाद बिखेर देते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह तरीका खाद की उपयोगिता को शून्य कर देता है।
धूप से खत्म होते हैं जरूरी तत्व
शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि जब खाद को तेज धूप में खुला छोड़ दिया जाता है, तो इसके गंभीर नुकसान होते हैं:
- नाइट्रोजन का नुकसान: सूर्य की पराबैंगनी किरणें खाद में मौजूद नाइट्रोजन को गैस के रूप में उड़ा देती हैं।
- बैक्टीरिया की मौत: गोबर की खाद में करोड़ों की संख्या में मित्र बैक्टीरिया होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं। सीधी धूप के संपर्क में आते ही ये जीवाणु मरने लगते हैं।
- पोषण का अभाव: जब खाद के जरूरी तत्व ही खत्म हो जाते हैं, तो वह केवल सूखी मिट्टी बनकर रह जाती है और फसलों को कोई पोषण नहीं मिलता।
सही तरीका अपनाना है जरूरी
मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बनाए रखने के लिए खाद का सही प्रबंधन अनिवार्य है। विशेषज्ञों की सलाह है कि खाद को हमेशा नमी वाले वातावरण में रखें या उसे मिट्टी में तुरंत मिला दें। दोपहर की तेज धूप में खाद को खुला छोड़ने से बचें ताकि उसके पोषक तत्व सुरक्षित रहें और आपकी फसल को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
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