सेहत से भरपूर पारंपरिक चाय
झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में सुबह की शुरुआत दूध वाली चाय के बजाय एक विशेष आयुर्वेदिक मसाला चाय के साथ होती है। स्वास्थ्य के नजरिए से यह चाय न केवल हल्की है, बल्कि स्वाद में भी बेहतरीन मानी जाती है। सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में दूध का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाता है, जिससे यह पाचन के लिए बहुत अनुकूल होती है।
इस प्रकार तैयार करें विधि
इस चाय को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है। यदि आप एक कप चाय तैयार करना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें:
- सबसे पहले एक बर्तन में लगभग दो कप पानी लें और उसे गैस पर अच्छी तरह उबालें।
- उबलते हुए पानी में अदरक, काली मिर्च, लौंग, तेजपत्ता और तुलसी के ताजा पत्ते डालें।
- अब इसमें अपने स्वाद के अनुसार चीनी और चायपत्ती मिलाएं।
- इस मिश्रण को तब तक मध्यम आंच पर उबलने दें जब तक पानी की मात्रा घटकर आधी न रह जाए।
- अंत में इसे छानकर गरमा-गरम परोसें।
स्वाद बढ़ाने के लिए सुझाव
यदि आप इस हर्बल चाय का स्वाद और अधिक बढ़ाना चाहते हैं, तो आप इसमें थोड़ा सा नींबू का रस, चुटकी भर काला नमक और जीरा पाउडर भी मिला सकते हैं। ये अतिरिक्त सामग्री न केवल चाय का जायका बदल देती हैं, बल्कि इसके औषधीय गुणों को भी बढ़ाती हैं।
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