टीएमसी के चुनाव चिह्न पर बागी गुट का दावा, चुनाव आयोग को सौंपे 11 पन्नों के दस्तावेज

तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जताते हुए चुनाव आयोग से संपर्क किया है, जबकि दूसरी ओर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

चुनाव आयोग के समक्ष बागी गुट का पक्ष

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में बागी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग पहुंचकर दावा किया है कि असली टीएमसी वे ही हैं। बागी गुट ने अपनी बात को मजबूती देने के लिए चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को 11 पन्नों का एक विस्तृत दस्तावेज सौंपा है। इस ज्ञापन में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना कानूनी हक जताने के साथ ही नेशनल वर्किंग कमेटी की नई नियुक्तियों और पार्टी के नए कार्यालय के पते का भी उल्लेख किया गया है।

नया पता और संगठनात्मक बदलाव

बागी गुट द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पार्टी का नया कार्यालय 2031, राजडांगा मेन रोड, जीए-124, तीसरी मंजिल, कोलकाता-107 पर स्थित है। हालांकि, ऋतब्रता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह एक अस्थायी पता है और पार्टी अपने स्थायी मुख्यालय के लिए जगह की तलाश कर रही है। इसके अतिरिक्त, बागी गुट ने आयोग को उन पदाधिकारियों की सूची भी सौंपी है जिन्हें पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है। बागी नेताओं ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यदि पार्टी के वित्तीय मामलों में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो एक ऑडिटर के माध्यम से उसकी गहन जांच करवाई जाएगी।

ममता गुट और भाजपा की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी खेमे ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि जब इन नेताओं ने चुनाव लड़ा था, तब उनके नामांकन पत्र पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर थे, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वे किस दल से संबंधित हैं। कुणाल घोष ने कहा कि जनता सब देख रही है और इन लोगों को इसका जवाब मिल जाएगा। इस राजनीतिक उठापटक के बीच अभिषेक बनर्जी के ममता बनर्जी के आवास पर पहुंचने की खबर है।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे पर कटाक्ष किया है। भाजपा नेता शिशिर बजोरिया ने कहा कि जो पार्टी 15 सालों तक सत्ता में थी, वह अब बिखर रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता ने अब कमल को चुन लिया है और तृणमूल कांग्रेस का अस्तित्व अब कमजोर पड़ चुका है।

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