भोजपुर एनकाउंटर मामला: मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजा नोटिस, मांगी रिपोर्ट

बिहार के भोजपुर एनकाउंटर मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने अधिकारियों से मांगा जवाब

भोजपुर जिले में हुई पुलिस मुठभेड़ की घटना का बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को तलब किया है। अधिवक्ता एस. के. झा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली समीक्षा 13 जुलाई 2026 को आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनंत मनोहर बदर द्वारा की जाएगी।

याचिका में की गई सख्त जांच की मांग

अधिवक्ता एस. के. झा ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और पटना स्थित राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। अपनी याचिका में उन्होंने मांग की है कि इस मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही, उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की भी अपील की है।

पुलिस पर गिरी गाज और राजनीतिक बयानबाजी

भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद से ही यह मामला चर्चा में है। एडीजी सुधांशु कुमार ने स्वीकार किया कि 16 जून को पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में लापरवाही बरती गई थी। इस चूक के कारण एक एसएचओ, दो एसआई, एक एएसआई और एक कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, भाजपा नेता अश्विनी चौबे ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भरत तिवारी को बेगुनाह बताते हुए इसे एक साजिश करार दिया है और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

https://www.indiatv.in/bihar/human-rights-commission-takes-cognizance-of-bhojpur-encounter-case-summons-officials-2026-06-22-1226784