भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, राजदूत सर्जियो गोर का दावा- केवल 1 फीसदी मुद्दे ही शेष

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील करीब 99 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और महज 1 प्रतिशत मुद्दे ही सुलझाने बाकी हैं। उन्होंने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में इस समझौते पर हस्ताक्षर संभव हैं।

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता लगभग 99 प्रतिशत तक तय हो चुका है और अब केवल 1 प्रतिशत बचे हुए मुद्दों को सुलझाने पर काम चल रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद नजदीक पहुंच चुके हैं और बहुप्रतीक्षित इस करार पर आने वाले कुछ हफ्तों के भीतर मुहर लग सकती है। मुंबई में आयोजित 'सिटी 2026 इंडिया कॉन्फ्रेंस' में बोलते हुए गोर ने बताया कि अमेरिका का व्यापार प्रतिनिधिमंडल फिलहाल समझौते को लेकर बातचीत के लिए भारत में मौजूद है।

मंगलवार से शुरू हुई तीन दिवसीय वार्ता

एक अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के ब्योरे को अंतिम रूप देने के लिए भारत और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार से तीन दिवसीय बातचीत की शुरुआत की। इस समझौते का खाका इसी वर्ष फरवरी में तैयार कर लिया गया था। अमेरिकी पक्ष की अगुवाई उसके मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, वहीं भारत की ओर से वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन प्रमुख वार्ताकार की भूमिका निभा रहे हैं।

अमेरिकी टैरिफ का दायरा वैश्विक

सर्जियो गोर ने 11 और 12 मार्च, 2026 को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा बंधुआ मजदूरी और अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता से जुड़े मामलों पर 60 देशों के विरुद्ध धारा-301 के तहत शुरू की गई जांच को लेकर भी अपनी बात रखी। यूएसटीआर ने 2 जून को बंधुआ मजदूरी से जुड़ी जांच के नतीजे सामने रखते हुए 60 अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया था। गोर का कहना था कि अमेरिका द्वारा तय किए गए ये टैरिफ वैश्विक स्तर पर लागू हैं और इनका निशाना खासतौर पर भारत नहीं है।

सिर्फ भारत निशाने पर नहीं

उन्होंने कहा, ''ये टैरिफ केवल भारत पर लागू नहीं किए गए हैं। ये यूरोपीय संघ, कनाडा, मेक्सिको, जापान और दक्षिण कोरिया समेत एशिया के तकरीबन सभी देशों पर लगाए गए हैं।'' इस दौरान गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच निजी रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जनवरी, 2021 से जनवरी, 2025 के बीच जब ट्रंप सत्ता से बाहर थे, उस समय भी प्रधानमंत्री मोदी उनके संपर्क में बने रहे।

मुश्किल वक्त में साथ देने वालों को महत्व देते हैं ट्रंप

अमेरिकी राजदूत ने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना नहीं करते। ट्रंप के पद से बाहर रहने के दौरान भी वे उनके संपर्क में रहे और राष्ट्रपति इस बात को याद रखते हैं।'' उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों नेताओं की दोस्ती का विशेष महत्व है। गोर के मुताबिक, मुश्किल घड़ी में साथ निभाने वाले मित्रों को राष्ट्रपति ट्रंप खास अहमियत देते हैं और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति उनका यही भाव है।

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