काम की तलाश में आंध्र प्रदेश गए, बीमारी लेकर लौटे पूर्णिया के मजदूर; एक की मौत से दहशत

रोजगार की उम्मीद में पूर्णिया और सीमांचल से आंध्र प्रदेश की एक फैक्ट्री में काम करने गए कई मजदूर गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। एक मजदूर की मौत हो चुकी है और कई अन्य अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें सिलिकोसिस की पुष्टि हुई है।

बेहतर कमाई की चाह में घर-परिवार छोड़कर दूसरे राज्यों में जाने वाले मजदूरों के लिए कभी-कभी यह सफर जानलेवा साबित हो जाता है। बिहार के पूर्णिया और सीमांचल इलाके से हर साल बड़ी तादाद में लोग रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों का रुख करते हैं, और इनमें से कई को खतरनाक हालात में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला पूर्णिया जिले से सामने आया है, जहां आंध्र प्रदेश की एक फैक्ट्री में काम करने गए कई मजदूर गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। इनमें से एक मजदूर की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

करीब 40 मजदूर गए थे आंध्र प्रदेश

मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्णिया जिले के कस्बा थाना क्षेत्र के जीयनगंज और आसपास के गांवों के करीब 40 मजदूर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के नेमांकल्लू गांव स्थित आशीर्वाद मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में काम करने पहुंचे थे। बीमार मजदूर विक्रम कुमार और फरहान आलम ने बताया कि उन्हें ठेकेदार जुनेद आलम वहां लेकर गया था।

दोनों मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री में उनसे पत्थर कटाई और केमिकल से जुड़े काम कराए जाते थे, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समुचित व्यवस्था मौजूद नहीं थी।

लगातार धूल और केमिकल ने बिगाड़ी तबीयत

मजदूरों का कहना है कि लगातार धूल और केमिकल के संपर्क में रहने की वजह से एक के बाद एक कई लोगों की सेहत बिगड़ने लगी। अब तक आठ मजदूर गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं, वहीं मजदूर मसद आलम की दो दिन पहले मौत हो गई।

बीमार मजदूरों में विक्रम कुमार, श्रवण कुमार, मोहम्मद राजीक, सीतेश कुमार, रंगोली कुमार और ऊपिन कुमार शामिल हैं, जिनका इलाज पूर्णिया के जीएमसीएच में चल रहा है। इसके अलावा दो मजदूरों को गंभीर हालत में पटना एम्स में भर्ती कराया गया है।

फेफड़ों और सीने में जमा हुई धूल, सिलिकोसिस की आशंका

जीएमसीएच में इलाज कर रहे डॉक्टर पंकज कुमार ने बताया कि पत्थर की फैक्ट्री में काम करने के दौरान मजदूरों के फेफड़ों और सीने में धूल तथा खतरनाक कण जमा हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में उनमें सिलिकोसिस बीमारी होने की बात सामने आई है। यह बीमारी लंबे समय तक सिलिका धूल के संपर्क में रहने के कारण होती है।

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

सिविल सर्जन डॉ. पीके कनौजिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर अन्य मजदूरों की भी जांच शुरू कर दी है। करीब 30 से 40 लोगों का एक्स-रे और स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक एक मजदूर की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए कल्याण विभाग को भी पत्र भेजा गया है।

इस घटना के बाद मजदूरों की सुरक्षा और दूसरे राज्यों में काम करने वाले श्रमिकों की कार्य परिस्थितियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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