उत्तराखंड की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बसा नैनीताल अपनी मनमोहक झीलों और चहल-पहल भरी मॉल रोड के लिए दुनियाभर में मशहूर है। मगर इस पर्यटन नगरी की पहचान सिर्फ इन्हीं तक सीमित नहीं है। यहां एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर भी मौजूद है, जिसे देखने के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग खिंचे चले आते हैं।
पाइन्स में बसी 130 साल पुरानी विरासत
नैनीताल के पाइन्स क्षेत्र में स्थित ब्रिटिशकालीन कब्रिस्तान करीब 130 साल पुराना है। बीते एक सदी से भी अधिक समय से यह स्थल इतिहास के उन पन्नों का गवाह बना हुआ है, जब अंग्रेजी हुकूमत का दौर था। आज भी यह जगह उस बीते युग की कहानियों को अपने भीतर संजोए हुए है।
दोनों विश्व युद्धों की यादों का गवाह
यह कब्रिस्तान प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की स्मृतियों को सहेजे हुए है। युद्ध के मैदान में अपनी जान न्योछावर करने वाले सैनिकों और अधिकारियों को यहीं दफनाया गया था। यही वजह है कि यह स्थल सिर्फ एक कब्रिस्तान भर नहीं, बल्कि बलिदान और इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज है।
अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल
इस कब्रिस्तान का महत्व सिर्फ स्थानीय या राष्ट्रीय स्तर तक नहीं है। यह 'कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन' के अंतर्गत आता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान देता है। इसी कारण विदेशों से भी पर्यटक और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग इसे देखने नैनीताल पहुंचते हैं।
इतिहास प्रेमियों के लिए खास जगह
जो लोग नैनीताल की भीड़भाड़ से हटकर कुछ अलग और शांत अनुभव करना चाहते हैं, उनके लिए यह हेरिटेज साइट किसी खजाने से कम नहीं। यहां आकर सैलानी न केवल बीते युग की झलक पाते हैं, बल्कि उन वीरों को भी याद करते हैं जिन्होंने युद्ध में अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।
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