उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रैक से लापता हुईं बबीता पांडेय की तलाश लगातार जारी है। चार दिन बीत जाने के बावजूद उनका कहीं कोई पता नहीं चल पाया है। सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल यही है कि आखिर बबीता अपने साथियों से किन परिस्थितियों में और कैसे अलग हुईं। माना जा रहा है कि इसी सवाल का जवाब मिलने पर पूरे मामले की दिशा बदल सकती है।
खोज अभियान में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग के साथ अब आईटीबीपी और आर्मी के जवान भी जुट गए हैं। क्षेत्र के घने जंगलों, गहरी खाइयों और दुर्गम इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। तलाशी के दौरान टीमें उन विशाल प्राकृतिक गुफाओं तक भी पहुंच रही हैं, जहां पहुंचना बेहद जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण है। हाल ही में सामने आई एक तस्वीर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जवान किस तरह जान जोखिम में डालकर इन इलाकों में बबीता की खोजबीन कर रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार बबीता की तलाश में हर संभावित स्थान को खंगाला जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अभियान पूरी गंभीरता और सतर्कता के साथ चलाया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द कोई सुराग हाथ लग सके।
एसपी ने क्या कहा?
उत्तरकाशी की एसपी कमलेश ने बताया कि चूंकि यह एक युवा महिला की गुमशुदगी से जुड़ा मामला है, इसलिए पूरी गंभीरता के साथ तलाश और जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों और पुलिस मुख्यालय से भी निर्देश प्राप्त हुए हैं, जिसके अनुरूप एक सीओ स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में पूरी टीम गठित की गई है।
हम हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रहे हैं, चाहे वह मोबाइल से संबंधित हो, चाहे सीसीटीवी या सर्विलांस हो। उम्मीद है कि जल्द ही सफलता मिलेगी।
अब झील पर टिकीं तलाश की उम्मीदें
चौथे दिन भी कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया, लेकिन जंगलों और दुर्गम इलाकों की लगातार छानबीन के बाद अब पूरे सर्च ऑपरेशन की निगाहें एक रहस्यमयी झील पर टिक गई हैं। यह झील उसी कैंप के बेहद करीब स्थित है, जहां से बबीता के अचानक लापता होने की आखिरी जानकारी सामने आई थी।
पिछले कई दिनों से अलग-अलग एजेंसियों की टीमें जंगल का कोना-कोना खंगाल चुकी हैं, मगर अब तक कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इस झील के भीतर कोई अहम सुराग छिपा हो सकता है। मौके पर 6 सदस्यीय विशेष डीप सर्च टीम पहुंचने वाली है। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस गोताखोर और विशेषज्ञ झील की गहराइयों में उतरकर बारीकी से तलाशी अभियान चलाएंगे। यह झील या तो गुमशुदगी के रहस्य से पर्दा उठा सकती है या फिर मामले को और उलझा सकती है।
बबीता पांडेय कौन हैं?
बबीता पांडेय नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनकी उम्र 24 से 30 वर्ष के बीच बताई गई है। वह एमबीए की छात्रा हैं और एक निजी कंपनी से भी जुड़ी रही हैं।
वह कब और कहां लापता हुईं?
बबीता 29 मई 2026 को अपने साथियों के साथ उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं। ट्रेक के दौरान वह अपने समूह से अलग हो गईं। बाद में पता चला कि वह घोई (Ghoi) कैंपसाइट क्षेत्र से आधी रात के आसपास लापता हुईं और तभी से उनका कोई पता नहीं चल सका है।
अब तक सर्च ऑपरेशन में क्या-क्या हुआ?
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, डॉग स्क्वायड और ड्रोन टीमों को खोज अभियान में लगाया गया है। टीमों ने घोई कैंपसाइट, दयारा बुग्याल के आसपास के जंगलों, खाइयों, दुर्गम इलाकों और संभावित मार्गों की तलाशी ली है, लेकिन अब तक बबीता का कोई सुराग नहीं मिला है। एक झील में गोताखोर भी तलाशी कर रहे हैं।
फर्जी परमिट का मामला क्या है?
जांच में सामने आया है कि बबीता और उनके दो साथियों के नाम कथित तौर पर एक एक्सपायर हो चुके ट्रेकिंग परमिट पर चस्पा किए गए थे। अधिकारियों को शक है कि नियमों, रजिस्ट्रेशन और फीस से बचने के लिए पुराने परमिट का दोबारा इस्तेमाल किया गया। इसके बाद फर्जी परमिट रैकेट की जांच भी शुरू कर दी गई है।
क्या झील या गुफाओं से कोई कनेक्शन मिला?
सर्च टीमें दुर्गम क्षेत्रों, जंगलों और प्राकृतिक संरचनाओं तक पहुंची हैं, लेकिन किसी झील या गुफा से अब तक बबीता का कोई पता नहीं चल पाया है। फिलहाल बड़े पैमाने पर खोज अभियान जारी है।
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