मध्य प्रदेश में सड़क धंसी या पुल टूटा तो पल भर में मंत्री और अफसरों को मिलेगी सूचना, जानें नई व्यवस्था

मध्य प्रदेश का लोक निर्माण विभाग 1 जुलाई से 'रियल-टाइम इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम' लागू करने जा रहा है, जिससे सड़क धंसने या पुल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी कुछ ही मिनटों में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच जाएगी।

मध्य प्रदेश में सड़कों और पुलों जैसी बुनियादी सुविधाओं की निगरानी अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को परखने के लिए एक बड़ा तकनीकी कदम उठाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार अब सड़क धंसने, पुल के क्षतिग्रस्त होने या किसी गंभीर सड़क हादसे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई शुरू करने के लिए नया 'रियल-टाइम इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम' तैयार कर रही है।

1 जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू होगी व्यवस्था

विभाग आगामी 1 जुलाई से इस आधुनिक प्रणाली को पूरे राज्य में लागू करने जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि किसी भी हादसे या नुकसान की लाइव जानकारी महज कुछ मिनटों के भीतर सीधे विभागीय मंत्री के कार्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल तक पहुंच जाएगी। इससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी।

दूसरे राज्यों के दौरे के बाद लिया गया फैसला

इस महत्वाकांक्षी व्यवस्था को लागू करने का निर्णय पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में बने एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के अध्ययन दौरे के बाद लिया गया। 14 सदस्यीय इस दल ने 1 और 2 जून को महाराष्ट्र और गुजरात का सघन दौरा कर वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल और मॉनिटरिंग सिस्टम का बारीकी से अध्ययन किया। इसी क्रम में सोमवार को मंत्री राकेश सिंह ने महाराष्ट्र के नेतृत्व से मुलाकात कर विभिन्न परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

बाईसेग तैयार कर रहा विशेष मोबाइल ऐप

इस प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए 'भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान' (बाईसेग) एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन तैयार कर रहा है। इस ऐप का ट्रायल वर्जन 20 जून तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा।

प्रणाली का कार्य करने का तरीका बेहद सरल रखा गया है। निर्माण स्थल या दुर्घटना स्थल पर तैनात इंजीनियर घटना की लाइव फोटो खींचकर उसका पूरा ब्योरा सीधे ऐप पर अपलोड कर सकेंगे। ऐप में जीपीएस (GPS) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे घटना की सटीक लोकेशन अपने आप दर्ज हो जाएगी। पूरी व्यवस्था की कमान और निगरानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के हाथों में रहेगी।

महाराष्ट्र के वित्तीय मॉडल का अध्ययन

मध्य प्रदेश सरकार बुनियादी ढांचे के विकास के लिए महाराष्ट्र के वित्तीय मॉडल का भी गहराई से अध्ययन कर रही है। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की 6,600 करोड़ रुपये की 'मिसिंग लिंक परियोजना' और समृद्धि महामार्ग के वित्तीय प्रबंधन को देखा। यहां एसेट सिक्योरिटाइजेशन और टोल राजस्व के जरिये बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी मॉडल को मध्य प्रदेश में धार्मिक और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाले कॉरिडोर और गलियारों के निर्माण के लिए अपनाया जा सकता है।

गति शक्ति पोर्टल और जल संचयन पर भी जोर

बैठक में यह भी तय हुआ कि मिट्टी सर्वेक्षण से जुड़े सभी अहम आंकड़े अब 'पीएम गति शक्ति पोर्टल' पर अपलोड किए जाएंगे। साथ ही भूजल मैपिंग की आधुनिक तकनीक के आधार पर सड़कों के किनारे वाटर रिचार्जिंग बोर के लिए सबसे उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाएगा, ताकि बारिश के पानी का सही ढंग से संचयन हो सके।

दौरे में शामिल रहे ये अधिकारी

इस अध्ययन यात्रा और अहम निर्णयों के दौरान प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह, एमपीआरडीसी के एमडी भारत यादव और भवन विकास निगम के एमडी सीबी चक्रवर्ती समेत कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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