राजस्थान में हाल ही में हुई अच्छी बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है। लंबे समय से मानसून की प्रतीक्षा कर रहे किसानों के खेतों में अब पर्याप्त नमी आ चुकी है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई का काम तेजी पकड़ने लगा है। नागौर समेत प्रदेश के कई जिलों में किसान बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार और तिल जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई में जुट गए हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार समय पर हुई वर्षा ने खेतों में नमी का स्तर बढ़ा दिया है, जिससे बीजों के बेहतर अंकुरण की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि किसानों को सलाह है कि बहुत अधिक गीली मिट्टी में बुवाई करने से बचें। जब मिट्टी भुरभुरी हो और खेत में संतुलित नमी बनी रहे, तभी बुवाई करना अधिक फायदेमंद होता है। ऐसा करने पर पौधों की शुरुआती बढ़त मजबूत होती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है।
प्रमाणित बीजों का करें चुनाव
कृषि विशेषज्ञ बजरंग चौधरी का कहना है कि ज्यादा पैदावार के लिए किसानों को प्रमाणित और रोग प्रतिरोधी बीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप कृषि विभाग की अनुशंसित किस्मों को चुनने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं। सही बीज का चयन आगे चलकर रोग और कीटों के खतरे को भी घटाता है।
बीज उपचार को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों के मुताबिक बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक और जैव उर्वरकों से उपचारित करना बेहद जरूरी है। इससे बीज जनित रोगों से बचाव होता है और अंकुरण प्रतिशत बेहतर रहता है। दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर का प्रयोग नाइट्रोजन स्थिरीकरण को बढ़ाता है, जिससे पौधों का विकास तेज होता है।
संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं
कई किसान केवल नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों पर ही निर्भर रहते हैं, जबकि फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्व भी फसल की बढ़वार के लिए उतने ही अहम हैं। विशेषज्ञों ने मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी है। इसके साथ ही जैविक खाद और गोबर की खाद का इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मददगार साबित होता है।
खरपतवार और जलभराव से बचाव जरूरी
खरीफ फसलों के शुरुआती 30 से 40 दिन सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस अवधि में खरपतवार तेजी से पनपते हैं और फसल के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचाते हैं। समय पर निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। मूंग, मोठ और तिल जैसी फसलें जलभराव सहन नहीं कर पातीं, इसलिए खेत में अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखना भी आवश्यक है।
कीट और रोगों पर रखें नजर
बारिश के बाद बढ़ी नमी के कारण कई तरह के कीट और रोग सक्रिय हो जाते हैं। किसानों को नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करते रहना चाहिए, ताकि शुरुआती अवस्था में ही समस्या को पहचानकर उसका नियंत्रण किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषण और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसल का चयन करने से किसानों को अधिक उत्पादन के साथ बेहतर मुनाफा भी मिल सकता है।
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