हिमाचल में प्री-मॉनसून बारिश का कहर: रामपुर में गाड़ियों पर गिरा पेड़, चंबा के नाले में फ्लैश फ्लड से 20 भेड़-बकरियों की मौत

हिमाचल प्रदेश में प्री-मॉनसून बारिश और आंधी से नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। रामपुर में पेड़ गिरने से दो गाड़ियां दब गईं, जबकि चंबा में फ्लैश फ्लड से 20 भेड़-बकरियों की मौत हो गई और बीबीएमबी ने ब्यास नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ने की चेतावनी दी है।

हिमाचल प्रदेश में प्री-मॉनसून की बारिश ने दस्तक दे दी है। बीती रात से ही प्रदेश का मौसम बिगड़ा हुआ है और कई इलाकों में आंधी-तूफान देखने को मिला। भारी बारिश के कारण कई जिलों में नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। चंबा से नुकसान की खबर है, जहां फ्लैश फ्लड में भेड़-बकरियों की मौत हो गई।

रामपुर में गाड़ियों पर गिरा पेड़

जानकारी के मुताबिक बीती रात हरियाणा की ओर से आए तूफान के असर से प्रदेश में जमकर बारिश हुई। इसी दौरान गुरुवार शाम शिमला जिले के रामपुर में बारिश के बीच एक पेड़ गिर गया और उसके नीचे दो गाड़ियां दब गईं। घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग बाल-बाल बचते दिख रहे हैं।

चंबा के नाले में 20 भेड़-बकरियों की मौत

चंबा के रजेरा स्थित गढ़ नाला में जलस्तर अचानक बढ़ने से बीस भेड़-बकरियां मलबे में दब गईं और उनकी मौत हो गई। वहीं भरमौर-पठानकोट हाईवे पर भरमौर के सरेंई नाला में मलबा आ जाने से कुछ गाड़ियां थोड़ी देर के लिए वहीं फंस गईं। उधर कुल्लू के बंजार में शमशर नाला उफान पर आ गया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

कहां कितनी बारिश दर्ज हुई

मौसम विज्ञान के शिमला केंद्र ने शुक्रवार सुबह 10 बजे जारी बुलेटिन में बताया कि बीते 12 घंटे में सोलन के कसौली में सबसे अधिक 105 एमएम बारिश दर्ज की गई।

  • सोलन का धर्मपुर: 86 एमएम
  • सिरमौर का धौलाकुआं: 43 एमएम
  • पालमपुर: 40 एमएम
  • सोलन: 34 एमएम
  • जोत: 30 एमएम
  • सराहन: 30 एमएम
  • नाहन: 26 एमएम

मौसम विभाग ने बीती रात अलर्ट जारी करते हुए कहा था कि करीब 220 किमी लंबी स्क्वॉल लाइन पंजाब और हरियाणा की ओर बढ़ी थी, जिसका असर हिमाचल प्रदेश में दिखा और करीब 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली।

अगले पांच दिन कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार 12 जून को प्रदेश में येलो और ऑरेंज अलर्ट रहेगा। इस दौरान बारिश, तूफान और ओले गिरने की आशंका है। 16 जून तक प्रदेश में येलो अलर्ट के बीच बारिश का सिलसिला जारी रहेगा और 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान भी आ सकता है। शुक्रवार के लिए विभाग ने बारिश व तूफान का येलो अलर्ट और ओले गिरने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बारिश के चलते प्रदेश में पारा छह डिग्री तक लुढ़क गया है।

आज कहां-कहां बारिश के आसार

शिमला केंद्र की ओर से जारी तात्कालिक पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम करवट ले सकता है। शिमला शहर में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और एक-दो दौर हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। सोलन और सिरमौर जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 30–40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आंधी-तूफान की आशंका है।

लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा शिमला, मंडी और हमीरपुर समेत मध्य पर्वतीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में भी हल्की वर्षा के आसार हैं, जबकि ऊना, बिलासपुर और कांगड़ा के कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश दर्ज हो सकती है।

पंडोह बांध में बढ़ा जलस्तर, ब्यास में पानी छोड़ने की चेतावनी

पहाड़ों पर बारिश और बर्फ पिघलने के चलते मंडी के पंडोह बांध में भी पानी का स्तर बढ़ गया है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने ब्यास नदी में 3,000 क्यूसिक तक अतिरिक्त पानी छोड़ने की चेतावनी जारी की है। पानी छोड़े जाने के बाद निचले हिस्सों में जलस्तर दो से तीन मीटर तक बढ़ सकता है। इसे लेकर मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा—तीन जिलों में अलर्ट भेजा गया है।

हिमाचल में कब होगी मॉनसून की एंट्री

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की एंट्री 22 से 25 जून के बीच हो सकती है। देश के करीब 18 राज्यों में मॉनसून पहुंच चुका है और प्रदेश में प्री-मॉनसून का दौर शुरू हो गया है। अनुमान है कि करीब 25 जून के आसपास मॉनसून हिमाचल में दाखिल होगा। इस दौरान शिमला, मनाली, कुल्लू, धर्मशाला और मंडी समेत कई इलाकों में लगातार बारिश के आसार बने हुए हैं।

लाहौल घाटी में बढ़ी ठंडक

जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की लाहौल घाटी में मौसम ने अचानक करवट ली है। बीती शाम से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने घाटी में ठंड बढ़ा दी है और तापमान गिरकर 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इस बारिश से किसानों और बागवानों को बड़ी राहत मिली है, जबकि प्रशासन संभावित मानसूनी आपदाओं को लेकर सतर्क हो गया है।

इन दिनों घाटी के किसान आलू, मटर समेत विभिन्न नकदी फसलों और पारंपरिक कृषि कार्यों में व्यस्त हैं। फसलों की बुवाई के बाद खेतों को पर्याप्त नमी की जरूरत होती है, ऐसे में यह बारिश किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।

चंबा में मूसलाधार बारिश से बड़ी राहत

चंबा जिले में पिछले 10-12 दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी के बाद हुई मूसलाधार बारिश ने लोगों को बड़ी राहत दी। बारिश के बाद तापमान में करीब 9 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और पारा 35 डिग्री से घटकर 26 डिग्री तक पहुंच गया, जिससे पूरे क्षेत्र का मौसम सुहावना हो गया।

सुबह के समय आसमान पूरी तरह साफ था और स्कूली बच्चे बिना छाते व बरसाती के स्कूल पहुंचे, लेकिन दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और तेज बारिश शुरू हो गई। छुट्टी के समय कई बच्चे बारिश में भीगते हुए घर पहुंचे और उन्होंने इसका भरपूर आनंद भी उठाया। तेज बारिश के कारण सड़कों पर पानी नदी की तरह बहता नजर आया। मक्की समेत अन्य फसलों के लिए यह बारिश बेहद लाभदायक मानी जा रही है।

सूखी जमीन को मिली संजीवनी

लंबे समय से सूखी पड़ी जमीन को नमी मिलने से खेती-किसानी के कार्यों को गति मिलेगी। बारिश का असर पर्यावरण पर भी सकारात्मक रूप से देखने को मिला है। पिछले दिनों जंगलों में लगी आग और धुएं के कारण वातावरण में प्रदूषण बढ़ गया था और वन्य जीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। बारिश के बाद अधिकांश क्षेत्रों में जंगल की आग शांत हो गई है, जिससे पर्यावरण को राहत मिली है।

मौसम में आई ठंडक का लाभ पर्यटन कारोबार को भी मिलने की उम्मीद है। चंबा, डलहौजी और खज्जियार जैसे पर्यटन स्थलों का मौसम सुहावना होने से आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। स्थानीय लोगों और किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से चंबा में असहनीय गर्मी पड़ रही थी और तापमान 35 डिग्री तक पहुंच गया था, जिससे दोपहर के समय बाजारों में भीड़ कम हो गई थी। उनके अनुसार अचानक हुई इस बारिश से तापमान में भारी गिरावट आई है और मौसम पूरी तरह खुशनुमा हो गया है।

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