बाजार के केमिकल साबुन-शैम्पू पर भारी पड़ रहा पहाड़ का 'रामबास', नहाने से कपड़े धोने तक हर काम में असरदार

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के दानपुर क्षेत्र में ग्रामीण और भेड़ पालक आज भी नहाने, बाल धोने और कपड़े साफ करने के लिए रामबास नाम के प्राकृतिक पौधे का इस्तेमाल करते हैं, जो त्वचा, बालों और पर्यावरण तीनों के लिए सुरक्षित माना जाता है।

आज जब बाजार केमिकल से बने साबुन और शैम्पू से अटे पड़े हैं, ऐसे दौर में उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का दानपुर क्षेत्र अपनी एक निराली और सदियों पुरानी परंपरा को आज भी संजोए हुए है। यहां के ग्रामीण और भेड़ पालक नहाने, बाल धोने और कपड़े साफ करने के लिए बाजार के साबुन की जगह रामबास नाम के एक खास पौधे का सहारा लेते हैं।

क्या है रामबास की खासियत

रीठे और शिकाकाई की ही तरह रामबास भी भरपूर मात्रा में झाग पैदा करता है। यही वजह है कि यह प्राकृतिक पौधा सफाई के काम में बेहद कारगर साबित होता है। इसका इस्तेमाल न सिर्फ शरीर और बालों की सफाई के लिए होता है, बल्कि कपड़ों की धुलाई में भी यह कमाल दिखाता है।

त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए वरदान

रामबास की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह त्वचा और बालों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। इसमें किसी तरह का हानिकारक रसायन नहीं होता, इसलिए इसके इस्तेमाल से किसी नुकसान का डर नहीं रहता। इतना ही नहीं, पर्यावरण की दृष्टि से भी यह पौधा किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि यह प्रकृति को कोई क्षति नहीं पहुंचाता।

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