बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार की बहुचर्चित गारंटी योजना गृहलक्ष्मी में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है। विभाग के आंतरिक ऑडिट में यह बात सामने आई कि लंबे समय तक इस योजना का लाभ ऐसी महिलाओं को मिलता रहा जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। अंतरिम ऑडिट रिपोर्ट में करीब एक लाख 48 हजार ऐसी महिला लाभार्थियों की पहचान हुई है जो मृत पाई गईं। इसी अनियमितता के कारण 128 करोड़ रुपये का बेकार भुगतान हो गया। ऑडिट में सामने आई इस गड़बड़ी ने योजना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीजेपी का सरकार पर आरोप
सरकार ने पूरी प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा करने का निर्णय लिया है। इसी बीच विपक्षी दल बीजेपी और जेडीएस ने आरोप लगाया कि समीक्षा के नाम पर अब तक करीब एक लाख 10 हजार महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि जो महिलाएं चुनाव के समय गृहलक्ष्मी थीं, चुनाव जीतने के बाद उन्हें अब अयोग्य ठहराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार का जवाब
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि गृहलक्ष्मी योजना के तहत लाभार्थियों का जो सत्यापन चल रहा है, उसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक सहायता केवल हकदार महिलाओं तक ही पहुंचे। उनके अनुसार इसका उद्देश्य लाभार्थियों की संख्या घटाना नहीं है। शिवकुमार ने बताया कि इस अहम कल्याणकारी योजना के क्रियान्वयन के दौरान कुछ खामियां सामने आई थीं, जिसके बाद सत्यापन अभियान शुरू किया गया। उन्होंने स्वीकार किया कि योजना की शुरुआत में जल्दबाजी के चलते कुछ पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया जा सका, जिनकी अब समीक्षा की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि असली लाभार्थियों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला करीब 9 महीने पहले उस समय शुरू हुआ जब बागलकोट जिले में एक घटना सामने आई। इसमें पता चला कि एक लाभार्थी महिला की मृत्यु के बावजूद उसके परिजन उसके बैंक खाते में जमा हो रहे पैसे निकाल रहे थे। इसके बाद गारंटी लागू करने के लिए बनी समिति ने पूरी प्रक्रिया का ऑडिट कराने का फैसला किया। हाल ही में जो ऑडिट रिपोर्ट गारंटी समिति को सौंपी गई, उसमें बताया गया कि इस योजना में तीन तरह से अनियमितताएं हो रही हैं।
पहली और सबसे बड़ी गड़बड़ी यह है कि कई महिलाओं की मृत्यु के बाद भी उनके खातों में पैसा भेजा जा रहा है और परिजन उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी खामी यह सामने आई कि कुछ महिलाएं आयकर के दायरे में आ चुकी हैं या किसी कारोबार के लिए जीएसटी भर रही हैं, फिर भी इस जानकारी को अपडेट किए बिना योजना का लाभ ले रही हैं। तीसरी गड़बड़ी यह पाई गई कि कई लाभार्थियों के बैंक खाते से एक से अधिक मोबाइल नंबर जुड़े हुए हैं, जिसके चलते रकम के हस्तांतरण की डिजिटल ट्रैकिंग में दिक्कतें आ रही हैं।
मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश
हालांकि पिछले कुछ महीनों में ऐसे लाभार्थियों की पहचान कर कुछ हद तक वसूली भी की गई है, लेकिन गलत तरीके से लाभ उठाने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। गड़बड़ी उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आपात बैठक बुलाकर अधिकारियों को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। इनमें प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:
- लाभार्थी डेटाबेस का दोबारा सत्यापन कर उसे फ्रीज करना और मृत्यु प्रमाणपत्र को सीधे बैंक खाते से जोड़ना।
- वार्षिक बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण या जीवन प्रमाण पत्र को अनिवार्य बनाना।
क्या है गृहलक्ष्मी योजना
गृहलक्ष्मी योजना कांग्रेस सरकार की प्रमुख गारंटी योजनाओं में से एक है, जिसके तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने ₹2,000 दिए जाते हैं। इस योजना का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। लेकिन ऑडिट में सामने आई गड़बड़ी ने योजना की निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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