मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक पूर्व इंजीनियर के पास से मिली बेहिसाब दौलत ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। भ्रष्टाचार के जरिए जुटाई गई इस संपत्ति का ब्योरा सामने आते ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी भी हैरान रह गए। मामला पीडब्ल्यूडी के पूर्व इंजीनियर गोविंद प्रसाद मेहरा से जुड़ा है, जिन्होंने अपने और परिजनों के नाम पर बड़े पैमाने पर धन-संपत्ति इकट्ठा कर रखी थी।
67 करोड़ की संपत्ति अटैच
ईडी की भोपाल जोनल यूनिट ने जब गोविंद प्रसाद मेहरा के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की, तो एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य सामने आते गए। जांच के आधार पर एजेंसी ने मेहरा और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी करीब 67 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच कर दी है। यह जांच भोपाल लोकायुक्त पुलिस की ओर से दर्ज किए गए मामले के आधार पर शुरू की गई थी।
लोकायुक्त की छापेमारी में बरामदगी
मिली जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त पुलिस की छापेमारी के दौरान गोविंद प्रसाद मेहरा और उनके परिवार से जुड़े परिसरों से 8.79 लाख रुपये नकद, करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये कीमत की सोने की ज्वेलरी, चांदी की ज्वेलरी व अन्य सामान तथा कई कीमती चीजें बरामद की गई थीं। मेहरा परिवार इन सबका कोई हिसाब-किताब नहीं दे सका था।
वैध आय सिर्फ चार करोड़
गोविंद प्रसाद मेहरा ने 4 मार्च 1985 को लोक निर्माण विभाग में नौकरी शुरू की थी और 29 फरवरी 2024 तक अपनी सेवाएं दीं। इस पूरी सेवा अवधि में उनकी वैध आय चार करोड़ रुपये रही, लेकिन लोकायुक्त पुलिस की जांच में मेहरा परिवार के पास करोड़ों की संपत्ति और भारी-भरकम खर्च का खुलासा हुआ। इसमें करीब 50 करोड़ रुपये कीमत का एक आलीशान कस्तूरी फार्महाउस भी शामिल था, जो 70 से 72 एकड़ में फैला है और जिसे लग्जरी फार्महाउस तथा रिजॉर्ट के रूप में विकसित किया गया था।
खेती की जमीन बन गई आलीशान रिजॉर्ट
ईडी की जांच में सामने आया कि गोविंद प्रसाद मेहरा और उनके परिजनों ने सोहागपुर तहसील के सैनी गांव में मौजूद कस्तूरी कृषि फार्म को एक शानदार रिजॉर्ट का रूप दे दिया था। यहां आवासीय इमारत, कॉटेज, पक्की सड़कें, कृत्रिम जलाशय, खेती के लिए जमीन और कई अन्य सुविधाएं विकसित की गई थीं।
एजेंसी की मूल्यांकन रिपोर्ट के मुताबिक, इस संपत्ति की बाजार कीमत करीब 49.44 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि यहां कराए गए निर्माण और विकास कार्य पर लगभग 16 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
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