बरसात में हरे चारे की कमी होगी दूर, जून में लगाएं नेपियर घास; 3-4 साल तक कटाई के साथ बढ़ेगा दूध उत्पादन!

नेपियर घास बरसात के मौसम में दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे का भरोसेमंद विकल्प है। जून में एक बार बुआई करने पर इससे तीन से चार साल तक पौष्टिक हरा चारा मिलता रहता है और दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।

बरसात का मौसम दस्तक देने वाला है और इस दौरान किसानों तथा पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे का इंतजाम करना बन जाती है। बारिश के दिनों में अक्सर खेतों में पानी भर जाता है, चारे की फसल खराब हो जाती है या समय पर हरा चारा नहीं मिल पाता, जिसका सीधा असर गाय-भैंस के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर पड़ता है। ऐसे में अगर किसान पहले से ही तैयारी कर लें तो बरसात में उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता। इसी समस्या का बेहतरीन समाधान है नेपियर घास, जो कम मेहनत में लंबे समय तक पशुओं को पौष्टिक चारा उपलब्ध कराती है।

कृषि विशेषज्ञ की राय

देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव बताते हैं कि नेपियर घास दुधारू पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद चारा है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि किसान एक बार इसकी खेती कर लें तो अगले तीन से चार साल तक उन्हें लगातार हरा चारा मिलता रहता है। बार-बार बीज बोने या खेत तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती, यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उनके अनुसार जून का महीना नेपियर घास लगाने के लिए सबसे उपयुक्त है, क्योंकि इस दौरान मौसम और नमी दोनों ही इसके विकास के अनुकूल रहते हैं।

जून में बुआई का सही समय

विशेषज्ञ के मुताबिक नेपियर घास की फसल करीब 30 दिनों में तैयार हो जाती है। अगर किसान जून में इसकी बुआई कर देते हैं तो बरसात शुरू होने से पहले ही पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में हरा चारा तैयार हो जाता है। इसके बाद चाहे कितनी भी बारिश हो, पशुपालकों को चारे की कमी का सामना नहीं करना पड़ता। यही कारण है कि इसे बरसात के मौसम का सबसे भरोसेमंद चारा माना जाता है। यह घास तेजी से बढ़ती है और बार-बार कटाई के बाद भी जल्दी दोबारा तैयार हो जाती है।

पोषण से भरपूर है यह घास

पोषण की दृष्टि से नेपियर घास काफी समृद्ध मानी जाती है। इसमें लगभग 7 से 12 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है। इसके साथ ही कैल्शियम और फास्फोरस जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी मौजूद रहते हैं, जो पशुओं की सेहत के लिए आवश्यक हैं। नियमित रूप से यह घास खिलाने पर पशु स्वस्थ रहते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और दूध उत्पादन भी बढ़ता है। कई मामलों में दूध उत्पादन में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों के लिए यह घास बेहद लाभकारी साबित हो रही है।

इन बातों का रखें ध्यान

नेपियर घास की एक और खासियत यह है कि इसकी खेती लगभग हर तरह की मिट्टी में की जा सकती है और इसके लिए किसी विशेष जमीन की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि अधिक पानी जमा होने से पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां पानी आसानी से निकल सके। साथ ही हर कटाई के बाद खेत में सिंचाई करना भी जरूरी है, ताकि घास तेजी से दोबारा बढ़े और उत्पादन लगातार बना रहे।

हर 20 से 25 दिन में कटाई

विशेषज्ञ बताते हैं कि नेपियर घास की कटाई हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर की जा सकती है। जितनी नियमित कटाई होगी, उतनी ही तेजी से नई घास निकलती रहेगी। कम लागत, आसान देखभाल और लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता के कारण यह घास आज पशुपालकों के लिए वरदान बन गई है। जो किसान अपने पशुओं के लिए सालभर पौष्टिक हरे चारे का इंतजाम करना चाहते हैं, उनके लिए जून में नेपियर घास की खेती शुरू करना एक समझदारी भरा कदम साबित हो सकता है।

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