रांची में किसानों के लिए खास ट्रैक्टर तैयार, सिंचाई और बिजली की समस्या होगी दूर

बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने एक बहुउद्देशीय ट्रैक्टर विकसित किया है जो खेती के साथ सिंचाई और बिजली उत्पादन में भी सक्षम है। इस नवाचार पर सरकार की ओर से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।

खेती के काम के साथ बिजली और पानी की सुविधा

झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने किसानों के लिए एक क्रांतिकारी समाधान पेश किया है। संस्थान ने एक ऐसा विशेष ट्रैक्टर तैयार किया है जो न केवल पारंपरिक कृषि कार्यों में मदद करता है, बल्कि सिंचाई और बिजली की कमी जैसी समस्याओं का भी अचूक इलाज है। यह ट्रैक्टर अपनी तरह का अनूठा नवाचार है, जो खेतों में जुताई और बुवाई जैसे सामान्य कार्यों के अलावा अतिरिक्त सुविधाओं से लैस है। इसके जरिए किसान पानी की किल्लत और बिजली के अभाव से जुड़ी अपनी बड़ी परेशानियों को हल कर सकते हैं।

बिजली उत्पादन की अनूठी क्षमता

इस ट्रैक्टर की कार्यक्षमता को लेकर जानकारी देते हुए आशीष ने बताया कि इसमें एक विशेष अल्टरनेटिव मशीन का संयोजन किया गया है। जैसे ही किसान ट्रैक्टर को चालू करते हैं, यह मशीन सक्रिय हो जाती है और बिजली पैदा करना शुरू कर देती है। यह सुविधा उन दूर दराज के ग्रामीण इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहां अब भी बिजली की निरंतर आपूर्ति एक बड़ी चुनौती है। आपातकालीन स्थिति में किसान इस तकनीक का उपयोग अपने घरों में बल्ब जलाने या अन्य छोटे उपकरणों को चलाने के लिए आसानी से कर सकते हैं, जिससे अंधेरे से निपटने में काफी मदद मिलेगी।

सिंचाई के लिए शक्तिशाली सेंट्रीफ्यूज पंप

बिजली के अलावा इस ट्रैक्टर का उपयोग सिंचाई के लिए भी किया जा सकता है। इसमें एक सेंट्रीफ्यूज मशीन को पुली के माध्यम से ट्रैक्टर के साथ जोड़ा गया है। ट्रैक्टर चालू होते ही यह मशीन भी अपना काम शुरू कर देती है, जिससे कुएं, तालाब या गहरे जल स्रोतों से पानी निकालकर सीधे खेतों तक पहुंचाया जा सकता है। इसमें 5 इंच का पाइप लगाया गया है, जिसकी मदद से खेतों की सिंचाई यानी पटवन की प्रक्रिया काफी सरल और तेज हो गई है। यह मशीन गहरे क्षेत्रों से भी पानी को खींचने में पूरी तरह सक्षम है।

सरकार दे रही है 80 प्रतिशत सब्सिडी

किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार इस आधुनिक ट्रैक्टर पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान कर रही है। इस मशीन की कुल कीमत ₹5 लाख निर्धारित की गई है। सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को 5 लोगों का एक समूह बनाना होगा। जो किसान इस विशेष ट्रैक्टर के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, वे बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वर्कशॉप में जाकर संपर्क कर सकते हैं। यह तकनीक न केवल खेती की लागत कम करेगी, बल्कि संसाधनों के अभाव में जूझ रहे किसानों के लिए एक आत्मनिर्भर विकल्प साबित होगी।

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