दिल्ली में चुनावी हलचल: मुख्यमंत्री और अरविंद केजरीवाल सहित 33 लाख वोटर्स को मिला नोटिस

दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं, जिसमें कई बड़े दिग्गज राजनेता भी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस का मतलब नाम काटना नहीं बल्कि दस्तावेजों की जांच करना है।

दिल्ली में वोटर्स लिस्ट पर मची सियासी खलबली

राजधानी दिल्ली की चुनावी राजनीति इस समय एक बड़े घटनाक्रम से गुजर रही है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया के तहत दिल्ली के मतदाताओं की सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव और सत्यापन का काम चल रहा है। इस प्रक्रिया में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों ने दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इसमें केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि कई बड़े वीआईपी और दिग्‍गज राजनेता भी शामिल हैं। इन नोटिसों के आने के बाद से सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर यह पूरी प्रक्रिया क्या है और किन आधारों पर ये नोटिस जारी किए गए हैं।

नोटिस पाने वाले दिग्गजों की सूची

इस लिस्ट में शामिल नाम हैरान करने वाले हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी नोटिस भेजा गया है, जिसमें उनके मामले में माता-पिता की उम्र और उनके बीच के अंतर से जुड़ी विसंगति का उल्लेख किया गया है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम भी उन लोगों की सूची में है जिनका रिकॉर्ड पुरानी SIR प्रक्रिया से मैप नहीं हो पा रहा है। केवल अरविंद केजरीवाल ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों जैसे उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, पिता गोविंद राम केजरीवाल, माता गीता देवी और बेटे पुलकित केजरीवाल को भी नोटिस प्राप्त हुआ है। इनके अलावा राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा तथा उनकी पत्नी को भी इसी तरह के नोटिस मिले हैं। वीरेंद्र सचदेवा के मामले में नाम में विसंगति का आधार बताया जा रहा है।

नोटिस के पीछे की तकनीकी वजहें

चुनाव आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कुल 33,12,919 मतदाताओं को नोटिस वाली श्रेणी में रखा गया है। इन नोटिसों को मुख्य रूप से दो तकनीकी श्रेणियों में बांटा गया है:

  • मैपिंग की समस्या: कुल 13,79,785 मतदाता ऐसे हैं जिनका रिकॉर्ड वर्ष 2002 की पिछली SIR वोटर लिस्ट के साथ मैप नहीं हो सका है।
  • तार्किक विसंगतियां: करीब 19,33,134 मतदाताओं के रिकॉर्ड में तार्किक या दस्तावेजों से जुड़ी कमियां पाई गई हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी 33 लाख से अधिक मतदाता 31 अगस्त को प्रकाशित हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में पहले से ही शामिल हैं। इसका अर्थ यह है कि नोटिस मिलने का मतलब यह कतई नहीं है कि इन लोगों का नाम सूची से हटा दिया गया है। ये केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित कर रहा है।

क्या नोटिस का मतलब वोट कट जाना है?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को नोटिस मिलने का सीधा सा अर्थ यह नहीं है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। यह केवल एक सत्यापन प्रक्रिया है। नोटिस के माध्यम से चुनाव अधिकारी आपसे आपके रिकॉर्ड में मिली किसी विसंगति को लेकर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं या कोई आवश्यक दस्तावेज जमा करने को कह रहे हैं। संबंधित मतदाता को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। यदि मतदाता सही दस्तावेज पेश कर देता है, तो अधिकारी उसे अंतिम वोटर लिस्ट में बरकरार रखेंगे।

अगले कदम और महत्वपूर्ण तारीखें

दिल्ली में इस चुनावी सत्यापन प्रक्रिया को लेकर एक स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। दावों और आपत्तियों को दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। यदि किसी नागरिक का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वे भी Form-6 के माध्यम से अपना नाम जुड़वाने का दावा पेश कर सकते हैं। इसके बाद, चुनाव विभाग इन दावों और नोटिसों पर सुनवाई करेगा। यह निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक जारी रहेगी। अंततः, दिल्ली की अंतिम वोटर लिस्ट 4 नवंबर 2026 को सार्वजनिक की जाएगी।

वोटर लिस्ट के बड़े आंकड़े

वर्तमान में प्रकाशित हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में लगभग 97.54 लाख नाम शामिल किए गए हैं। हालांकि, SIR की प्रक्रिया शुरू होने से पहले दिल्ली की वोटर लिस्ट में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 1.45 करोड़ थी। इसका मतलब है कि करीब 47.57 लाख नाम ऐसे हैं जो ड्राफ्ट रोल में नहीं आ पाए हैं। इन सभी मतदाताओं के लिए भी दावों और आपत्तियों का रास्ता खुला हुआ है। चुनाव आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी जानकारी की जांच करें और किसी भी प्रकार की विसंगति होने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर उचित प्रक्रिया का पालन करें ताकि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल हो सके।

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