राधा अष्टमी: कुरुक्षेत्र के इस्कॉन मंदिर में साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं राधा रानी के चरण-कमल, जानें क्यों है यह परंपरा खास

कुरुक्षेत्र के इस्कॉन मंदिर में राधा अष्टमी के पावन पर्व पर एक अद्भुत परंपरा निभाई जाती है, जहां साल में केवल एक बार भक्तों को श्री राधा रानी के चरणों के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।

राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व और दुर्लभ दर्शन

धार्मिक नगरी कुरुक्षेत्र स्थित इस्कॉन मंदिर अपनी विशेष आध्यात्मिक परंपराओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहाँ राधा अष्टमी के दिन एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिलता है जो साल में केवल एक बार ही संभव हो पाता है। इस्कॉन मंदिर में इस शुभ तिथि पर श्री राधा रानी के चरण-कमलों के दर्शन कराए जाते हैं। इस्कॉन कुरुक्षेत्र के पीआर और कम्यूनिकेशन डायरेक्टर गोविंद कृष्ण दास के अनुसार, श्री राधा रानी का प्राकट्य उत्सव यानी राधा अष्टमी का महत्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से किसी भी मायने में कम नहीं है। यही वह पावन दिन है जब राधा रानी का अवतरण हुआ था।

साल में केवल 30 मिनट का अवसर

सामान्य तौर पर इस्कॉन मंदिरों में श्री राधा रानी के चरण हमेशा वस्त्रों से ढके रहते हैं। इस्कॉन की परंपराओं के अनुसार, पूरे वर्ष भर भक्त उनके विग्रह के दर्शन तो करते हैं, लेकिन उनके चरणों को देखने का सौभाग्य साल में मात्र एक बार मिलता है। यह अत्यंत दुर्लभ अवसर केवल राधा अष्टमी के दिन ही प्राप्त होता है। गोविंद कृष्ण दास ने जानकारी दी है कि इस विशेष दिन पर भक्त सुबह 4:30 बजे से लेकर 5:00 बजे तक ही राधा रानी के चरणों के दर्शन कर सकते हैं। केवल 30 मिनट की इस अल्प अवधि के लिए भी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जो इस दर्शन को अपने जीवन का परम सौभाग्य मानते हैं।

भक्ति और आस्था का अनूठा संगम

गोविंद कृष्ण दास का कहना है कि श्री राधा रानी के चरणों के दर्शन करने के लिए न केवल उनके अनन्य भक्त आतुर रहते हैं, बल्कि देवी-देवता भी वर्ष भर इस विशेष दिन की प्रतीक्षा करते हैं। राधा अष्टमी के अवसर पर कुरुक्षेत्र के इस्कॉन मंदिर का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय और आध्यात्मिक हो जाता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु इस दिन का विशेष रूप से इंतजार करते हैं और मंदिर पहुंचकर राधा रानी के चरण-कमलों की एक झलक पाकर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं। यह दर्शन परंपरा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह मंदिर की एक विशिष्ट पहचान भी बन गई है।

आकर्षण का केंद्र है यह परंपरा

कुरुक्षेत्र के इस्कॉन मंदिर में आयोजित होने वाला यह विशेष कार्यक्रम हर वर्ष भक्तों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है। इस दिन मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों की संख्या और उनकी श्रद्धा इस परंपरा की भव्यता को दर्शाती है। पूजा-अर्चना के साथ-साथ कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन भी किया जाता है, जिससे पूरा मंदिर परिसर राधा-कृष्ण की भक्ति में सराबोर हो जाता है। भक्तों का मानना है कि राधा अष्टमी के दिन किए गए दर्शन से मन को शांति मिलती है और राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

परंपरा का निर्वहन

इस्कॉन परंपरा के भीतर श्री राधा रानी के प्रति अपार सम्मान और प्रेम के चलते उनके चरणों को ढका रखने की मर्यादा का पालन किया जाता है। साल की एकमात्र तिथि राधा अष्टमी को ही इस मर्यादा को विशेष अनुमति के साथ खोला जाता है। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि ईश्वर के दर्शन के लिए धैर्य और सच्ची निष्ठा का होना कितना अनिवार्य है। कुरुक्षेत्र इस्कॉन मंदिर प्रशासन इस दिन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध करता है ताकि भक्त शांतिपूर्वक और व्यवस्थित तरीके से दर्शन का लाभ उठा सकें।

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