इन दिनों इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग 1980-90 के दशक के लुक वाली अपनी तस्वीरें खूब साझा कर रहे हैं। इस एआई (AI) जनरेटेड ट्रेंड के माध्यम से लोग पुराने जमाने की सादगी को फिर से जीने की कोशिश कर रहे हैं। पुरानी यादों के इसी सिलसिले के बीच, उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के एक ऐसे रंगकर्मी चर्चा में हैं, जिन्होंने केवल तस्वीरों में ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी उस ऐतिहासिक और सुनहरे दौर को बेहद करीब से देखा और जिया है। हम बात कर रहे हैं उस दौर के वरिष्ठ कलाकार और सोशल मीडिया क्रिएटर सुनील गांधी की। सुनील गांधी ने उस जमाने की जीवनशैली और अभिनय जगत के अपने अनुभवों को बहुत ही खूबसूरती से बयां किया है, जब मनोरंजन का सबसे बड़ा जरिया सिर्फ दूरदर्शन हुआ करता था।
दूरदर्शन लखनऊ का वह स्वर्णिम युग और ‘पथरीले रास्ते’ की यादें
सुनील गांधी बताते हैं कि 1990 के दशक में लखनऊ दूरदर्शन ही आम जनता के मनोरंजन और सामाजिक जन-जागरूकता का सबसे बड़ा और विश्वसनीय माध्यम हुआ करता था। उस दौर में धारावाहिकों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता था। सुनील जी ने साल 1996 में जाने-माने निर्देशक हरीश तनेजा के कुशल निर्देशन में बने धारावाहिक ‘पथरीले रास्ते’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस सीरीज के अंतर्गत सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित कई कहानियां प्रसारित की जाती थीं, जिनमें ‘अनुभवहीन’ और ‘कसूरहीन’ जैसे बेहद लोकप्रिय एपिसोड शामिल थे।
सुनील गांधी बताते हैं कि इस धारावाहिक की खास बात यह थी कि इसकी अधिकांश शूटिंग बहराइच के ही विभिन्न ऐतिहासिक और स्थानीय स्थलों पर की गई थी। इसके मुख्य शूटिंग स्थलों में शामिल थे:
- बहराइच के डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत
- जिलाधिकारी (DM) बंगला
- राजा प्रेम सिंह का फॉर्म हाउस
- बहराइच का ऐतिहासिक घंटाघर
इस धारावाहिक में सुनील गांधी ने कुर्ता-पजामा और अंगौछा धारण करके एक ठेठ देहाती ग्रामीण व्यक्ति का किरदार निभाया था। उनके इस सजीव अभिनय के लिए उन्हें दूरदर्शन की ओर से कुल 18,000 रुपये का भुगतान मिला था। आज के समय में भले ही यह रकम छोटी लगे, लेकिन उस दौर में इतनी बड़ी राशि मिलना किसी भी कलाकार के लिए बेहद सम्मानजनक और बहुत बड़ी बात मानी जाती थी।
घर में टीवी का आगमन और 31 अक्टूबर 1984 का वह ऐतिहासिक दिन
सुनील गांधी ने अपने जीवन के उस सबसे खास दिन को याद किया जब उनके घर में पहली बार टेलीविजन सेट आया था। वह बताते हैं कि उस दौर में किसी के घर में टीवी का आना पूरे मोहल्ले और रिश्तेदारों के लिए किसी बड़े त्योहार या उत्सव की तरह होता था। उनके घर में 31 अक्टूबर 1984 को वेस्टन कंपनी का ब्लैक-एंड-व्हाइट शटर वाला टीवी आया था। उस समय इस टीवी की कीमत लगभग 1,500 रुपये थी।
सुनील जी बताते हैं कि इस तारीख का देश के इतिहास में एक अत्यंत दुखद महत्व है। इसी दिन भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की बेहद दुखद हत्या हुई थी। सुनील गांधी के परिवार ने इंदिरा गांधी की अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि का सीधा प्रसारण देखने के लिए ही विशेष रूप से यह टीवी खरीदा था।
उस समय टेलीविजन का आनंद लेना आज की तरह आसान नहीं था। छत पर एक बड़ा एंटीना लगाया जाता था। सुनील जी याद करते हुए बताते हैं कि अक्सर जब तेज हवा चलती थी या बंदर एंटीना हिला देते थे, तो स्क्रीन पर पिक्चर लहराने लगती थी और झिलमिलाहट आ जाती थी। इसके बाद घर के किसी एक सदस्य को छत पर जाकर एंटीना सीधा करना पड़ता था और नीचे बैठा व्यक्ति चिल्लाकर बताता था कि स्क्रीन साफ हुई या नहीं।
बिनाका गीतमाला का जादू और पुरानी डायरी का खजाना
रेडियो के सुनहरे दिनों को याद करते हुए सुनील जी ने बताया कि उस समय प्रसिद्ध उद्घोषक अमीन सयानी का लोकप्रिय कार्यक्रम ‘बिनाका गीतमाला’ हर घर की पसंद हुआ करता था। सुनील गांधी आज भी उन पुरानी यादों को अपने दिल में संजोकर रखे हुए हैं। उन्हें महान गायक मोहम्मद रफ़ी और किशोर कुमार के गाने बेहद प्रिय हैं। उनके पास आज भी उन सदाबहार गानों की अपने हाथों से लिखी हुई एक डायरी सुरक्षित है, जिसे वे अपनी सबसे मूल्यवान धरोहर मानते हैं।
पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते अभिनय की दुनिया से दूरी
जब सुनील जी से पूछा गया कि इतनी शानदार शुरुआत और बड़ी हस्तियों के साथ काम करने के बाद भी उन्होंने मुख्यधारा की एक्टिंग क्यों छोड़ दी, तो उन्होंने अपनी पारिवारिक और वैवाहिक जिम्मेदारियों का जिक्र किया। सुनील जी के अनुसार, विवाह और पारिवारिक जीवन की शुरुआत के बाद जिम्मेदारियों का दायरा काफी बढ़ गया था। वे और उनके भाई मिलकर अपने पारिवारिक व्यापार को संभालते थे। व्यापार की आवश्यकताओं और अपने भाई की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अभिनय के इस सफर से खुद को दूर कर लिया और व्यापार को समय दिया।
दिग्गजों से मुलाकात के यादगार पल और सोशल मीडिया पर आज भी सक्रियता
भले ही सुनील गांधी ने व्यावसायिक अभिनय से दूरी बना ली, लेकिन अपने करियर के दौरान उन्हें सिनेमा जगत की कई महान हस्तियों से मिलने और उनके साथ समय बिताने का मौका मिला। उन्होंने मुंबई के महमूद स्टूडियो सहित कई जगहों पर सुपरस्टार राजेश खन्ना, सुनील दत्त, गोविंदा, राज बब्बर और मशहूर पार्श्व गायक मोहम्मद अजीज जैसी हस्तियों से मुलाकात की थी।
भले ही जीवन की व्यावहारिक जरूरतों के कारण सुनील गांधी ने मुख्यधारा के पर्दे से विदाई ले ली, लेकिन उनके भीतर का कलाकार आज भी पूरी तरह से जीवंत है। वे आज भी यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों पर अपनी रील और बेहतरीन संवादों के जरिए हजारों प्रशंसकों का मनोरंजन कर रहे हैं और 1980-90 के दशक की सादगी और शालीन अभिनय शैली को जीवित रखे हुए हैं।
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