राजस्थान का सिरोही जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। इसी जिले के रेवदर उपखंड में स्थित मगरीवाड़ा गांव की अरावली पहाड़ियों में प्रकृति का एक ऐसा अनोखा और विस्मयकारी चमत्कार देखने को मिलता है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। यहां बिना किसी इंसानी कारीगरी, छैनी या हथौड़े के इस्तेमाल के, पहाड़ी की चट्टानों ने खुद-ब-खुद भगवान गणेश का एक विशाल स्वरूप धारण कर लिया है। करीब 1200 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह प्राकृतिक प्रतिमा आज क्षेत्र के हजारों लोगों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र बन चुकी है।
प्राकृतिक रूप से उभरी भगवान गणेश की अनूठी आकृति
इस पहाड़ी पर स्थित भगवान गणेश का यह स्वरूप किसी मूर्तिकार की कलाकृति नहीं है, बल्कि पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से निर्मित है। जब आप इस पहाड़ी को ध्यान से देखेंगे, तो आपको चट्टानों के अनूठे संयोजन में भगवान गणेश का सिर, उनकी सूंड, बड़े-बड़े कान और विशाल पेट जैसी आकृतियां एक साथ स्पष्ट रूप से दिखाई देंगी। इस अद्भुत प्राकृतिक प्रतिमा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह करीब 3-4 किलोमीटर की दूरी से भी साफ नजर आने लगती है।
मंडार के रहने वाले एक स्थानीय श्रद्धालु रामसिंह ने इस स्थान के इतिहास और इसके नामकरण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस गांव के चारों ओर कई छोटी-बड़ी पहाड़ियां मौजूद हैं, जिन्हें स्थानीय लोग अपनी बोलचाल की भाषा में 'मगरी' कहकर पुकारते हैं। पहाड़ियों की इसी बहुतायत के कारण इस गांव का नाम समय के साथ मगरीवाड़ा पड़ गया। इस विशेष पहाड़ी को भी लोग 'मगरी वाले गणेश' के नाम से जानते और पूजते हैं।
चरवाहों के जरिए दुनिया के सामने आया यह पावन स्थल
पुराने समय में इस दुर्गम और पथरीली पहाड़ी पर सामान्य लोगों का आना-जाना नहीं था। उस दौर में केवल स्थानीय चरवाहे ही अपनी बकरियों को चराने के लिए इस ऊंचाई तक आते थे। उन्हीं चरवाहों ने सबसे पहले पहाड़ी के इस अनोखे स्वरूप को देखा और समझा। इसके बाद धीरे-धीरे इस स्थान की महिमा चारों तरफ फैलने लगी और यह एक पवित्र धार्मिक स्थल के रूप में तब्दील हो गया। साल 2006 से यहां एक विशेष धार्मिक परंपरा की शुरुआत हुई, जिसके तहत हर साल श्रद्धालु बेहद कठिन और पथरीले रास्तों से होते हुए पहाड़ी की चोटी पर पहुंचते हैं और वहां पूरे विधि-विधान से ध्वजा चढ़ाते हैं।
रहस्यमयी गुफा और आपेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास
भगवान गणेश के इस विहंगम स्वरूप के बिल्कुल पास ही एक अत्यंत प्राचीन गुफा भी बनी हुई है। इस प्राकृतिक गुफा के भीतर प्राचीन आपेश्वर महादेव मंदिर स्थापित है, जहां लोग महादेव की आराधना करते हैं। सदियों से इस स्थान को महान संतों की तपोभूमि माना जाता रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां के प्रसिद्ध संत मुनिजी महाराज ने आज से लगभग 80 वर्षों पहले इस पवित्र स्थान पर लगातार 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। ऐसी लोकमान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से इस स्थान के दर्शन करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं और उसके परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
रावल पुजारी और ग्रामीणों द्वारा विशेष पूजा का आयोजन
हर साल इस पावन स्थल पर रावल पुजारी ब्राह्मण समाज के लोग और स्थानीय ग्रामीण मिलकर पहाड़ी पर चढ़ते हैं और विशेष पूजा-अर्चनो का आयोजन करते हैं। मगरीवाड़ा गांव के अलावा रेवदर, मंडार और आसपास के तमाम गांवों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। पहाड़ी का रास्ता सुगम न होने के कारण भक्त संकरी पगडंडियों और पत्थरों के सहारे चढ़ाई पूरी करते हैं और भगवान गणेश व महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
https://hindi.news18.com/news/rajasthan/sirohi-magrivada-village-natural-giant-ganesh-statue-hill-rajasthan-sirohi-news-local18-ws-k-10848114.html