डोनाल्ड ट्रंप का सत्ता परिवर्तन का सपना हुआ चकनाचूर, ईरान ने 40,000 लड़ाकों को दी सैन्य ट्रेनिंग

ईरान में चल रहे युद्ध के बीच तेहरान की सड़कों पर हजारों नागरिकों ने शक्ति प्रदर्शन किया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मौजूदगी में ईरान ने अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश देते हुए देश की सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर स्वयंसेवी बलों को तैयार करने का ऐलान किया है।

अमेरिका और इजरायल के लिए बढ़ती मुश्किलें

अमेरिका और इजरायल ने शायद कभी यह कल्पना भी नहीं की होगी कि ईरान के खिलाफ शुरू हुआ यह संघर्ष इतना लंबा खिंच जाएगा। वर्तमान में स्थिति यह है कि सशस्त्र संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है और युद्ध की विभीषिका होर्मुज से लेकर बाब अल-मंदेब स्ट्रेट तक फैल चुकी है। इस निरंतर जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न हुए ऊर्जा संकट की मार एशिया की तमाम तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रही है। ईरान में चल रहे युद्ध को अब 6 महीने से अधिक का समय बीत चुका है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान में सत्ता परिवर्तन और देश को तबाह करने का लक्ष्य अब भी एक सपना ही बना हुआ है। जमीनी हकीकत यह है कि अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद न तो युद्ध समाप्त हुआ है और न ही तेहरान में सत्ता का स्वरूप बदल पाया है। इसके उलट, ईरान ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है, यहां तक कि अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियरों को भी क्षति पहुंची है।

तेहरान में हुंकार और शक्ति प्रदर्शन

ईरान की राजधानी तेहरान से सामने आई तस्वीरें डोनाल्ड ट्रंप की धड़कनों को बढ़ाने के लिए पर्याप्त हैं। राजधानी की सड़कों पर हजारों की संख्या में पुरुषों और महिलाओं ने एकजुट होकर अमेरिका के खिलाफ अंतिम क्षण तक लड़ने का संकल्प लिया है। इस विशाल प्रदर्शन में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। रैली के वीडियो और तस्वीरों में महिलाओं को भी हथियारों के साथ देखा गया, जो देश की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस सरकारी रैली में कुल 3.13 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इस दौरान ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, जिसमें ड्रोन, एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम और अन्य आधुनिक हथियार शामिल थे।

40,000 स्वयंसेवकों को विशेष सैन्य प्रशिक्षण

ईरान ने अपनी रक्षा रणनीति को मजबूत करते हुए एक नई फोर्स तैयार की है। अधिकारियों के मुताबिक, इस नवगठित फोर्स के सदस्यों को सीमित सैन्य प्रशिक्षण के साथ इमरजेंसी रिएक्शन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह फोर्स इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बासिज मिलिशिया के लिए सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत के रूप में कार्य करेगी।

तेहरान के IRGC प्रमुख हसन हसंजादेह ने सरकारी प्रसारक IRIB को जानकारी दी कि 'जफांदा-ये-ईरान' अभियान के तहत अब तक 6 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। इस अभियान का शाब्दिक अर्थ 'ईरान के लिए प्राण न्योछावर करने वाले' है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 10 लाख के आंकड़े को पार कर जाएगी। इस प्रदर्शन के दौरान 40,000 लोगों को शुरुआती चरण में सैन्य प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

आर्थिक दबाव के बावजूद झुकने से इनकार

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने रैली को संबोधित करते हुए इसे एकजुटता का प्रतीक बताया। यह संदेश न केवल अमेरिका और इजरायल के लिए था, बल्कि देश के भीतर भी यह स्पष्ट किया गया कि ईरान की जनता किसी भी संकट का सामना करने के लिए कमर कस चुकी है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और नए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव बना हुआ है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इसे नागरिकों को अधिक से अधिक पीड़ा पहुंचाने के लिए चलाया जा रहा एक 'क्रूर आर्थिक युद्ध' करार दिया है। अमेरिका ने हाल ही में ईरान की प्रतिबंधित संस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच दिलाने वाले कथित अवैध डिजिटल करेंसी नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई की है। इसके बावजूद, ईरान अमेरिका के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है।

दुश्मनों के लिए दुस्वप्न

बासिज प्रमुख हुसैन ताएब ने रैली को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि स्वयंसेवक देश की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे और वे ईरान के दुश्मनों के लिए एक 'दुस्वप्न' साबित होंगे। इस स्वयंसेवी बल में महिलाओं और किशोरों की भागीदारी भी काफी अधिक है। बहेहरा नाम की एक स्वयंसेवक ने कहा कि वह दुनिया को दिखाना चाहती हैं कि ईरान मजबूत और एकजुट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए वे आखिरी दम तक लड़ने को तैयार हैं। एक अन्य स्वयंसेवक ने कहा कि यह उनकी जन्मभूमि है और वे किसी बाहरी ताकत को इसका भविष्य तय करने की अनुमति नहीं देंगे। ट्रंप का सत्ता परिवर्तन का सपना फिलहाल तो एक हसीन ख्वाब ही नजर आता है।

https://hindi.news18.com/world/middle-east-america-president-donald-trump-iran-regime-change-massive-solidarity-march-in-tehran-irgc-claim-40000-people-military-training-10847006.html