5 स्टार होटल में टूटी डील, थार में भरकर जंगल में फेंके गए 5 दुर्लभ ओरंगुटान: STF जांच में खुला सनसनीखेज सच

ओडिशा के बालेश्वर में मिले पांच दुर्लभ ओरंगुटान के बच्चों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। एक अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी का मामला सामने आया है जिसमें होटल में सौदा न होने पर होटल मालिक ने इन जीवों को जंगल में लावारिस छोड़ दिया था।

अंतर्राष्ट्रीय तस्करी का चौंकाने वाला खुलासा

ओडिशा के बालेश्वर से हाल ही में रेस्क्यू किए गए पांच दुर्लभ ओरंगुटान के बच्चों ने देश भर की सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। जांच में पता चला है कि इन मासूम जानवरों की बरामदगी के पीछे एक बहुत बड़ा अंतर्राष्ट्रीय वाइल्डलाइफ ट्रैफिकिंग रैकेट सक्रिय है। यह मामला पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित एक होटल से शुरू होकर ओडिशा के जंगलों तक जा पहुंचा, जिसने पुलिस और एसटीएफ यानी STF की जांच में तस्करी की एक डरावनी तस्वीर पेश की है। मामला तब सुर्खियों में आया जब लाखों रुपये की एक बड़ी डील अचानक कैंसिल हो गई और इसके बाद जो हुआ, वह वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद चिंताजनक है। वर्तमान में नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में इन ओरंगुटान की जान बचाने के लिए मैसूर जू और OUAT के विशेषज्ञों की टीम दिन-रात मेहनत कर रही है।

होटल में विफल हुई डील और थार का खौफनाक सफर

जांच से मिली जानकारी के मुताबिक, तस्कर पांचों ओरंगुटान के बच्चों को लेकर पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित ग्रैंड हेरिटेज होटल पहुंचे थे। यहां किसी बड़े खरीदार के साथ गुप्त तरीके से इन दुर्लभ जीवों का सौदा तय किया गया था। हालांकि, मौके पर खरीदार के न पहुंचने के कारण यह पूरी योजना ध्वस्त हो गई। खरीदार के नहीं आने से तस्कर घबरा गए और पुलिस पकड़े जाने के डर से इन बच्चों को होटल में ही छोड़कर मौके से फरार हो गए। इसके बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई जब होटल मालिक जयंत माइती और उसके बेटे सौम्यदीप माइती ने इस मामले को रफा-दफा करने का फैसला किया। पकड़े जाने के डर से पिता-पुत्र ने उन पांचों ओरंगुटान को अपनी काली थार गाड़ी में ठूंस लिया और दीघा के पास स्थित भोगराई के उदयपुर जंगल में ले जाकर उन्हें लावारिस हालत में फेंक दिया।

वन्यजीव तस्करी में शामिल हैं पिता-पुत्र

एसटीएफ की शुरुआती छानबीन में यह बात सामने आई है कि होटल मालिक पिता-पुत्र वन्यजीव तस्करी के काम में नए खिलाड़ी नहीं हैं। वे लंबे समय से अंतरराज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। उनके पुराने रिकॉर्ड को देखें तो पता चलता है कि गैंग के ये सदस्य पहले भी उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार होकर जेल की सजा काट चुके हैं। फिलहाल ओडिशा की एसटीएफ और स्थानीय पुलिस इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है और इस सिलसिले में जगह-जगह छापेमारी की जा रही है।

नंदनकानन में विशेषज्ञों की देखरेख में इलाज

उदयपुर जंगल से रेस्क्यू किए जाने के बाद इन पांचों ओरंगुटान को भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के हैंड रियरिंग सेंटर में शिफ्ट किया गया है। इन दुर्लभ प्राणियों की सेहत को देखते हुए प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए हैं:

  • विशेषज्ञों की तकनीकी टीम: ओरंगुटान के बच्चों की नाजुक स्थिति को देखते हुए मैसूर चिड़ियाघर के वेटेनरी डॉक्टर्स और OUAT के विशेषज्ञों की एक संयुक्त तकनीकी कमेटी का गठन किया गया है।
  • चौबीसों घंटे निगरानी: यह मेडिकल टीम 24 घंटे इन जीवों की सेहत की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रही है। जल्द ही इस टीम की ओर से एक विस्तृत हेल्थ रिपोर्ट पेश की जाएगी।

अंतर्राष्ट्रीय रैकेट का खौफ

यह घटना केवल स्थानीय स्तर की तस्करी नहीं है, बल्कि एक व्यापक ग्लोबल ब्लैक मार्केट नेटवर्क की ओर इशारा करती है। चूंकि ओरंगुटान मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के जंगलों में पाए जाते हैं, इसलिए भारत के बॉर्डर तक इनका पहुंचना यह साबित करता है कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह काम कर रहा है। ओडिशा एसटीएफ अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इन जीवों को किस रास्ते से भारत में तस्करी करके लाया गया और इस पूरी लॉजिस्टिक्स चेन का संचालन कहां से हो रहा था। यह मामला वन्यजीवों की तस्करी रोकने के लिए भारतीय सीमाओं पर सुरक्षा के दावों पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

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