समान नागरिक संहिता पर देश भर में गरमाई राजनीति, नीतीश कुमार ने बुलाई जेडीयू के सभी दिग्गज नेताओं की अहम बैठक

यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर छिड़ी बहस के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाई है। वहीं, अमित शाह के बयान के बाद से विपक्षी दलों का विरोध भी तेज हो गया है।

समान नागरिक संहिता पर मची हलचल

देश भर में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 21 राज्यों में UCC लागू करने के दावे के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। इस मुद्दे पर असदुद्दीन ओवैसी जैसे विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानूनों को थोपने का प्रयास बताया है। भोपाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने चुनौती दी कि सरकार देश के आदिवासी समुदायों को UCC के दायरे में लाकर दिखाए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां विशेष रूप से मुसलमानों को निशाना बनाने वाली होती हैं। इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी के सभी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों की एक विशेष बैठक बुलाई है, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गृह मंत्री का बड़ा दावा और उत्तर प्रदेश की सक्रियता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान यह दावा किया कि वर्ष 2029 से पहले देश के 21 राज्यों में UCC का विधेयक पेश कर दिया जाएगा। इस बयान के बाद देश भर में सियासी सक्रियता बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश में इसे लेकर विशेष तैयारी देखी जा रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में अमित शाह के साथ उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसी बीच, लखनऊ में योगी सरकार के वरिष्ठ मंत्री भूपेन्द्र चौधरी ने स्पष्ट संकेत दिए कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में UCC बिल जल्द ही लाया जा सकता है। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।

बिहार में बैठक का एजेंडा और जेडीयू का रुख

बिहार में UCC का विषय भाजपा के लिए चुनौतियों भरा हो सकता है। जेडीयू के कुछ विधायकों ने पहले ही इसके प्रति अपना विरोध जताया है, हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। ऐसी खबरें हैं कि नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई इस बैठक में UCC के अलावा फरक्का जल संधि जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी गहन विचार विमर्श किया जाएगा। बैठक को लेकर बिहार के उप मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने कहा कि सभी शंकाएं दूर होने के बाद ही पार्टी अपना आधिकारिक रुख तय करेगी। उल्लेखनीय है कि अगस्त महीने में भी नीतीश कुमार ने दिल्ली में पार्टी के सांसदों के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विशेष दिशा-निर्देश दिए थे।

अन्य राज्यों में UCC की स्थिति

उत्तर प्रदेश और बिहार के विपरीत कई भाजपा शासित राज्यों में UCC को लागू करने की प्रक्रिया काफी सरल दिखाई दे रही है। उत्तराखंड में 2025 से ही UCC लागू है, जबकि गोवा में यह व्यवस्था पहले से ही अस्तित्व में है। इसके अलावा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं में इस संबंधित विधेयक को मंजूरी मिल चुकी है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस दिशा में काम उन्नत चरणों में चल रहा है। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा के भीतर इसे लाने की घोषणा कर दी है, वहीं महाराष्ट्र सरकार एक गठित समिति की रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रही है।

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