जन्माष्टमी और पीरियड्स को लेकर धार्मिक मान्यताएं
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। हर भक्त अपने आराध्य की सेवा में लीन रहना चाहता है। हालांकि, कई बार महिलाओं के सामने यह उलझन पैदा हो जाती है कि यदि जन्माष्टमी के शुभ दिन उनके मासिक धर्म यानी पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो उन्हें व्रत रखना चाहिए या नहीं और पूजा की क्या प्रक्रिया होनी चाहिए। धर्मशास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, इस स्थिति में भी कृष्ण भक्ति से वंचित रहने की आवश्यकता नहीं है, बस कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।
क्या व्रत जारी रखा जा सकता है
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन निशिता काल में भगवान लड्डू गोपाल की विशेष आराधना की जाती है। यदि व्रत के दौरान या जन्माष्टमी के दिन पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, तो आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में उपवास को बीच में छोड़ना अनिवार्य नहीं है। यदि आपका स्वास्थ्य ठीक है और आप शारीरिक रूप से सक्षम महसूस कर रही हैं, तो आप अपना व्रत निरंतर जारी रख सकती हैं। हालांकि, यदि आपको बहुत अधिक कमजोरी महसूस हो रही है या तबीयत खराब है, तो व्रत को जारी रखने का अनावश्यक दबाव न लें।
व्रत का संकल्प कैसे लें
पीरियड्स के दौरान यदि आप व्रत रखना चाहती हैं, तो सुबह उठकर शुद्ध होने के बाद पूजा घर को स्पर्श करने से बचें। आप घर के किसी शांत स्थान पर बैठकर आंखें बंद करके भगवान कृष्ण के जन्म और उनके अभिषेक का ध्यान कर सकती हैं। मन ही मन श्रद्धा के साथ व्रत का संकल्प लेना पर्याप्त माना गया है।
पूजा और मूर्तियों से दूरी के नियम
मासिक धर्म के दौरान धार्मिक परंपराओं में पूजा पद्धति को लेकर कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। इस दौरान लड्डू गोपाल की प्रतिमा, तुलसी के पौधे या किसी भी पूजा सामग्री को सीधे हाथ से स्पर्श करने से बचना चाहिए। यदि आपको पूजा करनी है या अभिषेक करना है, तो आप घर के किसी अन्य सदस्य की सहायता ले सकती हैं। आप पूजा स्थल से थोड़ी दूरी पर बैठकर भगवान कृष्ण का स्मरण करें और मानसिक रूप से उनकी पूजा संपन्न करें।
भक्ति के अन्य सरल उपाय
यदि आप पूजा की वस्तुओं को नहीं छू सकतीं, तो भी भक्ति के कई मार्ग खुले हैं। आप दूर बैठकर मंत्रों का जाप कर सकती हैं, जैसे कि ओम नमो भगवते वासुदेवाय या हरे कृष्ण महामंत्र का मानसिक जप करें। इसके अतिरिक्त श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनना, श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ सुनना या मधुर भजनों का आनंद लेना कृष्ण भक्ति का ही एक रूप है।
भोग और प्रसाद के संबंध में सावधानियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीरियड्स के दौरान प्रसाद या भगवान का भोग खुद अपने हाथों से तैयार नहीं करना चाहिए। इस दौरान पंजीरी, माखन-मिश्री या अन्य कोई भी भोग घर के अन्य सदस्यों से बनवाएं। इसी प्रकार, तुलसी की माला या मंत्र जप वाली माला को भी हाथ न लगाएं। जब आपके मासिक धर्म के पांच दिन पूरे हो जाएं और पूर्ण शुद्धता आ जाए, तब आप गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर रसोई को शुद्ध करें और उसके बाद ही भगवान के लिए भोग बनाने का कार्य करें।
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