नरेंद्र मोदी और मसूद पेजेश्कियान की मुलाकात पर अमेरिका की तल्ख टिप्पणी, मार्को रुबियो ने दी कड़ी चेतावनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की हालिया मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी जारी की है कि ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

अमेरिका की बढ़ी चिंता और मार्को रुबियो का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की हालिया मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बैठक के बाद अमेरिका ने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका भारत और ईरान के बीच किसी भी संभावित व्यापार समझौते की संभावना को गंभीरता से नहीं देख रहा है। उन्होंने साथ ही उन देशों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है जो ईरान को अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के दायरे से बाहर निकलने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और मिसाइल हमलों के कारण क्षेत्र की स्थिरता पर बड़ा सवालिया निशान लगा हुआ है।

मोदी-पेजेश्कियान चर्चा के मायने

बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच हुई मुलाकात को वैश्विक कूटनीति के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के आगाज के बाद से यह दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय बातचीत थी। इस दौरान दोनों दिग्गजों ने व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने, पश्चिम एशिया में व्याप्त संघर्ष को शांत करने और चाबहार बंदरगाह से जुड़ी रणनीतिक परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में विशेष रूप से नागरिकों की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के संरक्षण और समुद्री मार्गों के जरिए होने वाली स्वतंत्र आवाजाही की सुरक्षा पर जोर दिया गया। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि भारत अपने व्यापक कूटनीतिक संपर्कों का उपयोग करते हुए इस संघर्षरत क्षेत्र में शांति वार्ता के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाए और लड़ाई को समाप्त करने में अपना योगदान दे।

रुबियो की चेतावनी और प्रतिबंधों का आधार

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में भारत-ईरान व्यापार समझौते की खबरों को खारिज किया। जब उनसे इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दोनों देशों के बीच ऐसी कोई डील आकार ले रही है। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक राष्ट्र अपनी विदेश नीति का निर्धारण करने के लिए स्वतंत्र है और दुनिया के कई देश समय-समय पर ईरानी सरकार के साथ संवाद करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अमेरिकी रुख को दो टूक शब्दों में दोहराया।

रुबियो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन का इरादा साफ कर दिया है। अमेरिका का मानना है कि किसी भी राष्ट्र को ईरान को ऐसे तरीके खोजने में मदद नहीं करनी चाहिए, जिनसे वह अपनी आय में वृद्धि कर सके। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान इस धन का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने और परमाणु हथियार विकसित करने के प्रयासों में कर सकता है। रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, यदि कोई देश ईरान को प्रतिबंधों से बचने का रास्ता मुहैया कराने का निर्णय लेता है, तो अमेरिका को उन देशों के खिलाफ भी प्रतिबंधात्मक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

चाबहार बंदरगाह और भारत की रणनीतिक स्थिति

भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है, जो मध्य एशिया और उससे आगे तक व्यापारिक मार्ग खोलने की क्षमता रखता है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना की प्रगति लगातार अनिश्चितताओं के साये में रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा यह दोहराया है कि पश्चिम एशिया के जटिल विवादों का हल केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकलना चाहिए। भारत का प्राथमिक उद्देश्य अपने व्यापारिक हितों, कनेक्टिविटी लक्ष्यों और रणनीतिक प्राथमिकताओं की रक्षा करना है, साथ ही वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने का पुरजोर समर्थन भी करता है।

मौजूदा स्थिति यह है कि भारत एक ओर ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ भी अपने रणनीतिक संपर्कों को बनाए रखे हुए है। भारत सरकार का रुख स्पष्ट है कि वह किसी भी दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार आगे बढ़ रही है, हालांकि अमेरिका का दबाव एक चुनौती के रूप में बना हुआ है। अब यह देखना शेष है कि आने वाले दिनों में भारत और ईरान के बीच रणनीतिक साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ती है और अमेरिका इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

https://hindi.news18.com/world/middle-east-marco-rubio-denies-trade-talks-at-pm-modi-pezeshkian-meet-10802800.html