धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज, 02 अगस्त 2026 को रविवार के पावन अवसर पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। देश और दुनिया के कोने-कोने से आए भक्तों ने भगवान महाकाल के अलौकिक रूप के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर में पंडे-पुजारियों द्वारा पूरी श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा की भव्य भस्म आरती संपन्न कराई गई। इस दिव्य आरती के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने करतल ध्वनि और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरे माहौल को शिवमय बना दिया।
बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती और दिव्य श्रृंगार
उज्जैन के राजा कहे जाने वाले बाबा महाकाल की भस्म आरती के लिए रविवार तड़के सुबह चार बजे ही मंदिर के कपाट खोल दिए गए थे। मंदिर के द्वार खुलने के बाद सबसे पहले पंडे-पुजारियों द्वारा वीरभद्र जी को आदरपूर्वक प्रणाम किया गया और स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद बाबा की आज्ञा लेकर चांदी का द्वार खोला गया और फिर सीधे गर्भगृह के कपाट खोले गए।
इसके बाद गर्भगृह में पुजारियों ने बाबा महाकाल का पुराना मनमोहक श्रृंगार उतारा और पंचामृत से उनका विशेष पूजन किया। इसके पश्चात भगवान की कर्पूर आरती की गई और फिर बाबा महाकाल का पवित्र जलाभिषेक किया गया। अभिषेक के इस पावन अनुष्ठान में भगवान महाकाल को दूध, घी, दही, शहद, शक्कर और विभिन्न मौसमी फलों के रस से बने पंचामृत से स्नान कराया गया।
अभिषेक संपन्न होने के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर का अत्यंत आकर्षक राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और विशेष आभूषणों से सजाया गया। उज्जैन के राजा को सूखी मेवा, ताजे फल और स्वादिष्ट मिठाइयों का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद ज्योतिर्लिंग पर अत्यंत श्रद्धापूर्वक पवित्र भस्म चढ़ाई गई। श्रृंगार के दौरान श्री महाकाल को चांदी का शेषनाग मुकुट, मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित ताजे फूलों की माला धारण कराई गई। इसी समय नंदी हॉल में भी विशेष श्रद्धा देखी गई, जहां शिवगण नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन संपन्न किया गया। बाबा महाकाल के इन अलौकिक दर्शनों के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
अन्न क्षेत्र में भक्तों को मिलेगा दक्षिण भारतीय स्वाद
श्री महाकालेश्वर मंदिर आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए अब एक बहुत बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था को और भी ज्यादा विशेष और स्वादिष्ट बनाने का निर्णय लिया है। मंदिर के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब अन्न क्षेत्र में दक्षिण भारतीय पारंपरिक व्यंजनों को भी शामिल किया जा रहा है। अब देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले भक्तों को हफ्ते में दो दिन विशेष रूप से इडली, सांभर, पुलिहोरा, पोंगल, पायसम और रसम जैसी प्रसादी परोसी जाएगी।
दान से संचालित होने वाले अन्न क्षेत्र में बदलाव
श्री महाकालेश्वर मंदिर का यह विशाल और निःशुल्क अन्न क्षेत्र पूरी तरह से श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान से संचालित होता है। यहां प्रतिदिन दो पालियों में लगभग 9000 श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा के साथ भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं। अब तक इस अन्न क्षेत्र में भक्तों को साधारण भोजन के रूप में रोटी, दाल, चावल, मौसमी सब्जी और विशेष अवसरों पर मिठाई परोसी जाती थी। लेकिन अब मंदिर समिति ने भक्तों की सुविधा और उनकी पसंद का ध्यान रखते हुए इस पारंपरिक व्यवस्था में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव करने का फैसला किया है।
मंदिर समिति द्वारा लिए गए इस नए निर्णय के तहत अब हर हफ्ते मंगलवार और शुक्रवार को विशेष रूप से दक्षिण भारतीय पारंपरिक प्रसादी तैयार की जाएगी और श्रद्धालुओं को परोसी जाएगी। इस नई योजना से दक्षिण भारत से आने वाले भक्तों को घर जैसा स्वाद मिलेगा, वहीं उत्तर भारत और अन्य क्षेत्रों के भक्तों को भी एक नया स्वाद चखने को मिलेगा।
विशेष प्रसाद का साप्ताहिक मीनू
मंदिर समिति द्वारा तय किए गए नए कार्यक्रम के अनुसार, सप्ताह के इन दो दिनों में भोजन प्रसादी का मीनू इस प्रकार रहेगा:
- मंगलवार का मीनू: इस दिन भक्तों को प्रसादी के रूप में इडली, सांभर, गर्म स्टीम चावल, स्वादिष्ट मौसमी सब्जी और मीठा पोंगल परोसा जाएगा।
- शुक्रवार का मीनू: इस दिन अन्न क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं को पारंपरिक पुलिहोरा, मीठा पायसम, रसम, गर्म स्टीम चावल और मौसमी सब्जी प्रसाद के रूप में वितरित की जाएगी।
दक्षिण भारतीय व्यंजनों की महत्ता और उनका स्वाद
मंदिर समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि उज्जैन एक विश्वप्रसिद्ध धार्मिक नगरी है, जहां बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं। ऐसे में अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की भोजन संस्कृति को मंदिर की प्रसादी में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को भी उज्जैन में अपनेपन और अपने क्षेत्र के स्वाद का सुखद अनुभव हो सके।
दक्षिण भारतीय व्यंजनों में शामिल किए गए पकवानों की अपनी विशेष पहचान है। उदाहरण के लिए, पुलिहोरा इमली और चुनिंदा मसालों से तैयार किया जाने वाला एक बेहद खट्टा-चटपटा चावल का पारंपरिक व्यंजन है। वहीं, पायसम दूध, चावल या सेवई से बनाई जाने वाली एक स्वादिष्ट मीठी खीर होती है, जिसे दक्षिण भारत में शुभ अवसरों पर जरूर बनाया जाता है। रसम की बात करें तो यह इमली और विशेष मसालों के मिश्रण से तैयार होने वाला एक बेहद हल्का और सुपाच्य सूप होता है। इसके साथ ही इडली-सांभर और पोंगल को दक्षिण भारत में सबसे लोकप्रिय और पवित्र प्रसाद के रूप में पूजा-पाठ के दौरान भी अर्पित किया जाता है।
उत्तर और दक्षिण के स्वाद का अद्भुत संगम
श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति को पूरा भरोसा है कि इस नई और अनूठी पहल से देश के अलग-अलग कोनों से आने वाले शिवभक्तों को प्रसादी में विविधता का एक नया और सुखद अनुभव प्राप्त होगा। बाबा महाकाल के पावन आशीर्वाद के साथ अब मंदिर के निःशुल्क अन्न क्षेत्र में उत्तर भारत और दक्षिण भारत की भोजन शैलियों का एक बहुत ही सुंदर और स्वादिष्ट संगम देखने को मिलेगा, जिससे श्रद्धालुओं की यात्रा और भी अधिक यादगार बन जाएगी।
https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/ujjain-mahakal-bhasmaarti-darshan-live-02-august-2026-shri-mahakaleshwar-temple-local18-10710464.html