30 की उम्र में डायबिटीज का खतरा: सिर्फ मीठा कम करना काफी नहीं, इन 5 संकेतों को नजरअंदाज न करें

आजकल 25 से 35 साल के युवाओं में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव का परिणाम मान रहे हैं। कई मामलों में शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।

युवाओं में क्यों बढ़ रही है डायबिटीज

एक दौर था जब डायबिटीज को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन मौजूदा समय में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब 30 वर्ष की उम्र में ही बड़ी संख्या में युवा इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। फरीदाबाद के जाने-माने डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. निशांत रायजादा का कहना है कि युवा पीढ़ी में इसका प्रसार काफी चिंताजनक है। इसका मुख्य कारण खराब खानपान, शारीरिक सक्रियता की कमी और तनावपूर्ण जीवनशैली है।

लक्षणों का न दिखना है खतरनाक

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 50 प्रतिशत मरीजों में डायबिटीज के कोई स्पष्ट शुरुआती संकेत नहीं मिलते हैं। कई बार लोग पूरी तरह सामान्य महसूस करते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उनका शुगर लेवल बढ़ा हुआ होता है। जब तक वे किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के लिए जांच करवाते हैं, तब तक शुगर काफी बढ़ चुकी होती है।

जांच का सही तरीका

डॉ. निशांत के अनुसार, केवल मीठा छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। अपनी सेहत को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर सही जांच करवाना आवश्यक है। शुगर के स्तर की सटीक जानकारी के लिए ये जांचें जरूरी हैं:

  • खाली पेट ब्लड शुगर टेस्ट।
  • खाना खाने के बाद ब्लड शुगर टेस्ट।
  • HbA1c टेस्ट, जिससे पिछले तीन महीनों की औसत शुगर का सटीक आकलन किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आप 30 वर्ष के आसपास हैं, तो नियमित अंतराल पर डॉक्टर से परामर्श करें और अपनी शारीरिक स्थिति की निगरानी करते रहें।

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