सीकर जिले के कदमा का बास गांव ने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की एक अनूठी मिसाल कायम की है। यहां के ग्रामीण करीब 500 वर्ष पुराने श्री राधा-कृष्ण मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए एकजुट हो गए हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर का 10 करोड़ रुपये की लागत से भव्य जीर्णोद्धार कराया जा रहा है।
जनसहयोग से आकार ले रहा अभियान
इस पूरे अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें गांव के लोगों, भामाशाहों और श्रद्धालुओं का जनसहयोग शामिल है। हर वर्ग के योगदान से यह विरासत संरक्षण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सामूहिक प्रयास ने इसे केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आस्था और सहभागिता का प्रतीक बना दिया है।
करौली के पत्थरों पर बारीक नक्काशी
मंदिर के निर्माण में करौली के पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जिन पर बारीक नक्काशी का कार्य कुशल कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थित पौराणिक कुंड का भी संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, ताकि उसकी प्राचीन भव्यता बनी रहे।
कर्दम ऋषि और कृष्ण से जुड़ी मान्यता
ग्रामीणों का मानना है कि यह स्थान कर्दम ऋषि और भगवान कृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का केंद्र है। महाभारत काल से जुड़ी कथाओं और यहां मौजूद प्राचीन कदंब वृक्षों के कारण इस क्षेत्र के प्रति लोगों की विशेष आस्था है।
धरोहर संरक्षण की मिसाल
मंदिर पुनर्निर्माण का यह अभियान अब पूरे इलाके में धरोहर संरक्षण की एक मिसाल बनता जा रहा है। ग्रामीणों का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।
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