एक ऐसी गलती जो ले सकती थी जान
दुनिया में कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जिन पर यकीन करना बेहद मुश्किल होता है। चीन से एक ऐसी ही हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां एक 90 साल की बुजुर्ग महिला अनजाने में दो दशकों तक एक मौत के सामान के साथ जी रही थी। जिसे वह अपने घर की रसोई का मामूली लोहे का औजार या हथौड़ा समझती रही, वह असल में चीन की सेना का एक टाइप 67 हैंड ग्रेनेड था। यह जानकर हर कोई दंग है कि 20 साल तक वह महिला इस ग्रेनेड से न केवल मिर्च मसाले कूटती रही, बल्कि अखरोट तोड़ने और कीलें ठोकने जैसे भारी काम भी करती रही।
खेत में मिला था 'मौत का तोहफा'
यह मामला चीन के हुबेई प्रांत के हुआंगबाओ काउंटी का है। करीब 20 साल पहले, जब यह महिला अपने खेत में काम कर रही थी, तब उसे मिट्टी के अंदर से धातु का एक भारी टुकड़ा मिला। उसकी बनावट और मजबूती देखकर महिला को लगा कि यह किसी काम का लोहे का औजार है। उसने उस चीज को अपने घर ले जाने का फैसला किया। उस समय उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वह अपने घर में कोई साधारण औजार नहीं, बल्कि एक सक्रिय बम लेकर आई है। उसने उसे अपनी रसोई की अलमारी में रख लिया और रोजाना के कामकाज में इस्तेमाल करने लगी।
रसोई का वह औजार, जो बन गया था डेली रूटीन का हिस्सा
पिछले 20 सालों से वह ग्रेनेड उस दादी की दिनचर्या का अभिन्न अंग बना हुआ था। यह सुनकर आज भी विशेषज्ञों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि वह महिला उस ग्रेनेड से क्या-क्या करती थी। वह इसे हथौड़े की तरह इस्तेमाल करती थी। रसोई में मसाले पीसने या सूखी लाल मिर्च को कूटने के लिए वह उसी ग्रेनेड का सहारा लेती थी। इसके अलावा, सख्त छिलके वाले अखरोट तोड़ने के लिए वह इसे पत्थर की तरह इस्तेमाल करती थी। घर की दीवारों में कीलें ठोकनी हों या लकड़ी के सामान की मरम्मत करनी हो, दादी बिना डरे उसे दीवार पर दे-मारती थी। हजारों बार उस ग्रेनेड पर चोट की गई, झटके लगे, लेकिन किस्मत इतनी जोरदार थी कि वह ग्रेनेड कभी नहीं फटा।
जून 2024 में हुआ इस खौफनाक राज का खुलासा
यह सिलसिला जून 2024 तक ऐसे ही बेपरवाह तरीके से चलता रहा। जून 2024 में महिला का पुराना घर ढहाने के लिए एक डिमोलिशन टीम वहां पहुंची। घर खाली करते समय जब मजदूरों ने रसोई के सामानों की जांच की, तो एक मजदूर की नजर उस अजीब दिखने वाले लोहे के टुकड़े पर पड़ी। मजदूर ने उसे गौर से देखा और उसे समझते देर नहीं लगी कि यह कोई घरेलू वस्तु नहीं है, बल्कि सेना का गोला-बारूद है। उस मजदूर ने घबराकर तुरंत स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ते को इसकी सूचना दी।
विशेषज्ञों की जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे बम डिस्पोजल विशेषज्ञों ने जब उस औजार की जांच की, तो उनके होश उड़ गए। वह कोई आम धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि चीन की सेना का टाइप 67 हैंड ग्रेनेड था। पुलिस ने तुरंत सावधानी बरतते हुए पूरे इलाके को खाली कराया और लोगों को दूर हटा दिया। बाद में, एक नियंत्रित विस्फोट के जरिए उस ग्रेनेड को सुरक्षित रूप से नष्ट किया गया। तब जाकर 20 सालों से उस घर में चल रहे 'मौत के खेल' का अंत हुआ।
क्या होता है टाइप 67 हैंड ग्रेनेड?
टाइप 67 हैंड ग्रेनेड को चीन ने 1960 के दशक के उत्तरार्ध में विकसित किया था। यह एक बेहद खतरनाक फ्रेगमेंटेशन ग्रेनेड है। इसके भीतर बारूद का एक ढांचा होता है, जो फटने के बाद लोहे के सैकड़ों जानलेवा नुकीले टुकड़ों में बंट जाता है। यह अपने आसपास के दायरे में भारी तबाही मचाने में सक्षम है।
हथौड़े की मार के बावजूद क्यों नहीं फटा?
दुनिया भर के लोग यही सोच रहे हैं कि आखिर 20 सालों तक लगातार पीटे जाने के बावजूद यह ग्रेनेड फटा क्यों नहीं? बम डिस्पोजल विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कुछ तकनीकी कारण हैं। ग्रेनेड में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं। टाइप 67 ग्रेनेड तभी सक्रिय होता है जब उसकी सेफ्टी पिन को खींचा जाए और फ्यूज असेंबली को एक्टिवेट किया जाए। चूंकि दादी ने कभी उस ग्रेनेड की पिन या फ्यूज के साथ छेड़छाड़ नहीं की थी, इसलिए मुख्य बारूद शांत बना रहा। साथ ही, बाहरी धातु की बॉडी पर चोट लगने के बावजूद अंदरूनी डेटोनेटर ट्रिगर नहीं हो सका। हालांकि, विशेषज्ञ इसे महज एक चमत्कार ही मानते हैं, क्योंकि पुराने सैन्य बम जंग लगने और समय बीतने के साथ बेहद संवेदनशील हो जाते हैं और कभी भी फट सकते हैं।
दादी की मासूमियत भरी प्रतिक्रिया
जब 90 साल की उस बुजुर्ग महिला को यह बताया गया कि वह 20 सालों से एक जिंदा बम के साथ जी रही थी, तो उसका रिएक्शन बहुत ही सरल और मासूम था। उसने शांति से जवाब दिया कि उसे तो बस यही लगा कि वह लोहे का एक मजबूत और उपयोगी औजार है। उसने कहा, 'मैं तो रोज ही उससे चीजों को कूटती-पीटती थी, मुझे कभी सपने में भी ख्याल नहीं आया कि वह इतना खतरनाक हो सकता है।' यह घटना वाकई में रोंगटे खड़े कर देने वाली है, जहां एक छोटी सी गलती के बावजूद किस्मत ने उस दादी की जान बचा ली।
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