हाईकोर्ट में हिंदी भाषा को लेकर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत का बड़ा बयान, एआई (AI) और लंबित मामलों पर कही यह बात

भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने हाईकोर्ट में हिंदी में सुनवाई के सवाल पर कहा कि यह राज्य सरकारों और संबंधित हाईकोर्ट की सहमति पर निर्भर करता है। इसके साथ ही उन्होंने न्यायपालिका में एआई के बढ़ते महत्व और लंबित मामलों को निपटाने की चुनौतियों पर भी अपनी राय रखी।

हाईकोर्ट में हिंदी और न्यायिक प्रक्रिया

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि अदालतों में अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी भाषा में न्यायिक कार्यवाही का मामला पूरी तरह से संबंधित हाईकोर्ट और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस दिशा में संबंधित हाईकोर्ट और राज्य सरकारें आपस में सहमति बना लेती हैं, तो इसे लागू करने के संबंध में उचित निर्णय लिया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब देश की विभिन्न अदालतों में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं।

न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका

एआई के न्यायिक कार्यों में उपयोग को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका पहले ही तकनीक को अपना रही है और भविष्य में इसका दायरा और अधिक विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल पूरी तरह से सही और विवेकपूर्ण तरीके से ही किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे। सीजेआई ने बताया कि एआई के उपयोग से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर आम जनता के लिए उपलब्ध हैं।

बुनियादी ढांचे और पार्किंग की समस्या पर सीजेआई

चंडीगढ़ स्थित जिला अदालत परिसर में एक नई और आधुनिक पार्किंग सुविधा का उद्घाटन करने के बाद सीजेआई ने कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से वकीलों, फरियादियों और आम नागरिकों को काफी सुविधा मिलेगी। उन्होंने स्वीकार किया कि यह परियोजना काफी समय से लंबित थी और न्यायपालिका के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए बुनियादी ढांचों को मजबूत करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके अलावा, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के परिसर में मौजूद पार्किंग की समस्या पर उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा की है और उन्हें पूरा भरोसा है कि जब वह अगली बार वहां का दौरा करेंगे, तो इस समस्या के समाधान की दिशा में ठोस प्रगति देखने को मिलेगी।

लंबित मामलों का सच और न्यायिक प्रबंधन

देश की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को लेकर सीजेआई ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अक्सर यह दावा किया जाता है कि देश की अदालतों में करीब 5 करोड़ मामले लंबित हैं, लेकिन इस आंकड़े को केवल संख्या के रूप में देखना सही नहीं है। सीजेआई के अनुसार, इन मामलों में से करीब 2 करोड़ मामले न्यायिक प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में हैं, जैसे कि नोटिस जारी होना या जवाब दाखिल करना। उन्होंने स्वीकार किया कि लंबित मामलों का भारी बोझ न्यायपालिका के सामने एक बड़ी चुनौती है। इसे कम करने के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग, गुणवत्तापूर्ण न्यायिक नियुक्तियों और बेहतर केस प्रबंधन पर लगातार काम किया जा रहा है।

तकनीक के मामले में भारतीय न्यायपालिका

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने दावा किया कि तकनीक के उपयोग और उसे अपनाने के मामले में भारतीय न्यायपालिका विश्व की अग्रणी न्यायिक व्यवस्थाओं में से एक है। ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और ऑनलाइन केस ट्रैकिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं ने देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले और सामाजिक रूप से वंचित लोगों तक न्याय की पहुंच को काफी सुगम बनाया है। उन्होंने कहा कि अब कोई भी व्यक्ति अपने शहर या गांव से ही आसानी से अपना मामला दायर कर सकता है, अपने स्थानीय वकील के माध्यम से वर्चुअल सुनवाई में शामिल हो सकता है और ऑनलाइन ही अपने केस की वर्तमान स्थिति व अगली तारीख की जानकारी प्राप्त कर सकता है।

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