अंबाला: वर्दी से संन्यास के बाद समाज सेवा का जुनून, पूर्व सैनिक प्रवीण पुंडीर नि:शुल्क ट्रेनिंग से बदल रहे हैं युवाओं की तकदीर

अंबाला के गांव बोह में रहने वाले पूर्व सैनिक प्रवीण पुंडीर युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए नि:शुल्क शारीरिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनकी मेहनत से अब तक दर्जनों युवा सेना और पुलिस में भर्ती होकर देश सेवा कर रहे हैं।

नशे के खिलाफ मैदान में उतरी एक फौजी की फौज

आज के दौर में जब युवा पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा नशे की गिरफ्त में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद कर रहा है, तब अंबाला छावनी के अंतर्गत आने वाले गांव बोह में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिलती है। यहाँ का खेल का मैदान केवल एक मैदान नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को आकार देने वाली एक पाठशाला है। इस पहल के सूत्रधार हैं पूर्व सैनिक प्रवीण पुंडीर, जिन्होंने सेना की वर्दी उतारने के बाद अपनी दूसरी पारी समाज के नाम कर दी है। प्रवीण पुंडीर रोजाना सुबह और शाम निस्वार्थ भाव से युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण देते हैं ताकि वे सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की परीक्षाओं में सफल होकर समाज का नाम रोशन कर सकें।

हर रोज 80 युवाओं को मिल रही नई दिशा

गांव बोह के इस खेल के मैदान में अनुशासन और कड़ी मेहनत का मेल देखने को मिलता है। यहाँ प्रवीण पुंडीर के मार्गदर्शन में रोजाना करीब 80 से अधिक युवा पसीना बहाते हैं। इनमें लगभग 50 लड़के और 30 लड़कियां शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को केवल दौड़ना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि शारीरिक फिटनेस के साथ ही एथलेटिक्स की विभिन्न विधाओं का अभ्यास भी कराया जाता है। इसमें लॉन्ग जंप, हाई जंप, शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और रनिंग हर्डल्स जैसे कठिन खेल शामिल हैं। इस व्यवस्थित ट्रेनिंग का सीधा मकसद युवाओं को सुरक्षा बलों में भर्ती होने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम बनाना है।

दो दशकों की सेवा के बाद शुरू हुआ यह मिशन

प्रवीण पुंडीर के इस जज्बे के पीछे उनका लंबा फौजी अनुभव है। उन्होंने वर्ष 1995 में भारतीय सेना में प्रवेश किया था और करीब 20 वर्षों तक देश की रक्षा करने के बाद वर्ष 2015 में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेना से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कुछ समय पुलिस विभाग में एसपीओ के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2017 में उन्होंने महसूस किया कि उनके गांव के युवा गलत संगत और नशे की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उन्हें बहुत आघात लगा। उन्होंने यह संकल्प लिया कि यदि इन युवाओं को खेल के मैदान की चुनौतियों में व्यस्त रखा जाए, तो उन्हें भटकाव से बचाया जा सकता है। इसी सोच ने 'फेयरलेस फिजिकल एंड स्पोर्ट्स अकादमी' को जन्म दिया।

सफलता की कहानी: 80 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी

प्रवीण पुंडीर की मेहनत आज परिणामों में तब्दील हो रही है। अब तक उनके द्वारा प्रशिक्षित किए गए लगभग 70 से 80 युवा-युवतियां भारतीय सेना, हरियाणा पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं का हिस्सा बन चुके हैं। यह सफलता न केवल उन युवाओं के परिवारों के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे गांव के लिए एक प्रेरणा है। प्रशिक्षण के इस कार्य में महिला प्रशिक्षक सपना भी प्रवीण पुंडीर का पूरा सहयोग कर रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में युवतियां भी इस ट्रेनिंग में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं।

आर्थिक तंगी बाधा नहीं बनी

इस अकादमी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ प्रशिक्षण पूरी तरह से नि:शुल्क है। प्रवीण पुंडीर का मानना है कि प्रतिभा को किसी आर्थिक बाधा की जरूरत नहीं होती। खेल उपकरणों और अन्य संसाधनों के लिए युवा आपस में मिल-जुलकर योगदान देते हैं। इसके अलावा, जो युवा सरकारी नौकरी पा लेते हैं, वे अपनी स्वेच्छा से अकादमी को आर्थिक मदद देते हैं ताकि आने वाली नई पीढ़ी को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें। यह सिलसिला आपसी सहयोग और भाईचारे की एक अनूठी मिसाल पेश करता है।

युवाओं की जुबानी बदलाव की कहानी

अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं के लिए प्रवीण पुंडीर एक मेंटर और एक मार्गदर्शक की तरह हैं। आकाश जैसे युवा, जो अब हरियाणा पुलिस के फिजिकल टेस्ट में सफल हो चुके हैं, बताते हैं कि एक पूर्व सैनिक का सानिध्य मिलना उनके लिए सौभाग्य से कम नहीं है। वहीं खिलाड़ी स्मृति ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें गांव में ही किसी बड़ी प्रोफेशनल अकादमी जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। स्मृति ने बताया कि वे सीबीएसई नेशनल गेम्स में भी भाग ले चुकी हैं और इस नि:शुल्क प्रशिक्षण के कारण ही वे अपने सपनों को हकीकत में बदलने की हिम्मत जुटा पा रही हैं। आज ये युवा नशे से कोसों दूर हैं और अपनी मेहनत से देश के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

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