गया में एक मासूम को मिला नया जीवन
बिहार के गया जिले से एक बेहद सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। यहाँ गुरुपा थाना क्षेत्र के रघुनाथ नगर गांव में एक 3 साल का मासूम बच्चा मौत के मुहाने से वापस लौट आया है। घटना गुरुवार देर शाम की है, जब खेल-खेल में बच्चा अचानक एक खुले बोरवेल में जा गिरा। बोरवेल की गहराई 30 फीट थी, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। प्रशासन और बचाव दलों ने तुरंत हरकत में आते हुए राहत कार्य शुरू किया और लंबी मशक्कत के बाद बच्चे को सकुशल बाहर निकालने में सफलता हासिल की।
रात भर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बचाव दल ने बिना देरी किए राहत कार्य प्रारंभ कर दिया। चूंकि मामला एक बच्चे की जान से जुड़ा था, इसलिए पटना से NDRF की टीम को भी तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बोरवेल के समानांतर खुदाई का कार्य शुरू किया गया। पूरी रात चली इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया में प्रशासन, पुलिस और ग्रामीणों ने एकजुट होकर सहयोग किया। अंततः 7 घंटे के अथक प्रयासों के बाद, शुक्रवार सुबह करीब 3 बजे NDRF की टीम ने मासूम पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
स्वास्थ्य केंद्र में जांच और डॉक्टरों की पुष्टि
बोरवेल से बाहर निकालने के तुरंत बाद बच्चे को एम्बुलेंस की मदद से फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम ने पीयूष का तुरंत स्वास्थ्य परीक्षण किया। राहत की बात यह है कि डॉक्टर ने बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया है। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है। बच्चे के सही-सलामत बाहर आ जाने की खबर मिलते ही परिजनों, स्थानीय निवासियों और बचाव दल के सदस्यों ने राहत की सांस ली।
प्रशासन ने दिए जांच के सख्त आदेश
घटनास्थल पर मौजूद आपदा विभाग के एडीएम और वजीरगंज डीएसपी ने बचाव दल के कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि त्वरित कार्रवाई के कारण ही बच्चे की जान बचाना संभव हो पाया। हालांकि, इस घटना ने बोरवेल को खुला छोड़ने जैसी गंभीर लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी भी व्यक्ति, एजेंसी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, नल-जल योजना के तहत बनाए गए बोरवेलों की स्थिति की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके। फिलहाल, पीयूष का सुरक्षित घर लौटना पूरे गांव के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
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