सात साल की लुका-छिपी का अंत
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए दहेज हत्या के एक पुराने मामले में वांछित चल रहे दो लोगों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों आरोपी पिछले सात साल से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे थे। स्वरूप नगर पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में महिला की मौत के बाद से ही पुलिस इनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कंचन (52) और जतिन (31) के तौर पर हुई है, जो आपस में सास और देवर हैं।
साल 2018 का मामला
यह पूरा वाकया जनवरी 2018 में सामने आया था, जब एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज के लिए की गई हत्या है। मायके वालों का कहना था कि ससुराल वालों ने गला दबाकर महिला की जान ली है। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498A, 304B और 34 के तहत मामला दर्ज किया था। परिजनों के आरोपों के बाद पुलिस ने इस मामले में हत्या की गंभीर धारा यानी 302 को भी जोड़ दिया था।
पुलिस की कार्रवाई और फरार होने की रणनीति
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला के पति और ससुर को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन सास कंचन और देवर जतिन पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके। आरोपियों ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका भी दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट से राहत न मिलने के बाद उन्होंने फरार होने का रास्ता चुना। इसके बाद अदालत ने दोनों को भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया था। पुलिस की टीमें लगातार उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी, लेकिन वे हर बार चकमा देने में सफल रहते थे।
कैसे बदल रहे थे अपने ठिकाने
क्राइम ब्रांच की पूछताछ में आरोपियों ने अपनी फरारी के दौरान अपनाए गए तौर-तरीकों का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि ये दोनों दिल्ली लौटने के बजाय अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान छुपाकर रह रहे थे। दिल्ली के केशव नगर की निवासी कंचन छिपने के लिए हरियाणा के यमुनानगर जाकर बस गई थी, जबकि देवर जतिन उत्तराखंड के देहरादून में शरण लिए हुए था। पुलिस के मुताबिक, वे काफी सतर्क थे और लंबे समय तक एक ही जगह पर नहीं रुके, ताकि पुलिस उन्हें ट्रैक न कर सके।
एक साथ दो स्थानों पर छापेमारी
बीते 15 जुलाई को पुलिस को एक महत्वपूर्ण गुप्त सूचना हाथ लगी, जिससे इस केस को सुलझाने में बड़ी मदद मिली। तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के जरिए पुलिस को पता चला कि कंचन हरियाणा के यमुनानगर में मौजूद है। उसी दौरान खबर मिली कि जतिन किसी निजी काम के सिलसिले में दिल्ली वापस लौटा है। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच ने एक साथ दो टीमों को सक्रिय किया। एक टीम ने हरियाणा के यमुनानगर में दबिश दी और कंचन को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दूसरी टीम ने दिल्ली के ओखला इलाके में घेराबंदी कर जतिन को धर दबोचा। सात साल तक कानून से बचने के बाद अब दोनों आरोपी पुलिस की हिरासत में हैं और उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है।
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