NEET UG का कमाल: बिहार के सहरसा में किराना दुकानदार के तीन बच्चों ने एक साथ पास की परीक्षा

बिहार के सहरसा जिले में एक किराने की दुकान चलाने वाले पिता के तीन बच्चों ने संसाधनों की कमी के बावजूद NEET UG परीक्षा पास कर एक बड़ी मिसाल कायम की है।

सहरसा के एक सामान्य परिवार की असाधारण सफलता

बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहाँ एक साधारण परिवार के तीन भाई-बहनों ने NEET UG जैसी कठिन प्रवेश परीक्षा में एक साथ सफलता प्राप्त कर सभी को हैरान कर दिया है। इन तीनों की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे पक्के हों और मेहनत करने का जज्बा हो, तो आर्थिक तंगी जैसी बाधाएं भी सफलता के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकतीं।

कोटा और दिल्ली जाने की नहीं थी आर्थिक क्षमता

सफलता हासिल करने वाले इन भाई-बहनों में रजनीश कुमार, प्रहलाद कुमार और उनकी बहन साक्षी शामिल हैं। इनका सपना डॉक्टर बनना था, लेकिन इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय संसाधनों की कमी थी। इनके पिता रोहित आनंद एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं, जिससे बमुश्किल घर का खर्च चल पाता है। इस स्थिति में, बच्चों को महंगी तैयारी के लिए कोटा या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भेजना उनके लिए पूरी तरह से असंभव था।

स्थानीय स्तर पर की तैयारी

रोहित आनंद और उनकी पत्नी पूनम देवी ने अपने बच्चों को स्पष्ट रूप से बता दिया था कि वे उन्हें बाहर भेजने की स्थिति में नहीं हैं। बावजूद इसके, बच्चों ने हार नहीं मानी और अपने शहर सहरसा में ही रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने वहां के एक स्थानीय कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया और पूरी लगन के साथ परीक्षा की तैयारी की। यह उल्लेखनीय है कि रजनीश और प्रहलाद ने अपनी स्कूली शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से पूरी की थी, जबकि उनकी बहन साक्षी ने बिहार बोर्ड से पढ़ाई की थी। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि होने के बाद भी, तीनों का लक्ष्य एक ही था और उन्होंने उसे हासिल भी किया।

माता-पिता का अटूट विश्वास बना ताकत

तीनों भाई-बहनों का कहना है कि उनकी इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का सबसे बड़ा योगदान है। तैयारी के दौरान जब तनाव का समय आया, तब उनके माता-पिता ने ही उन्हें सहारा दिया और हमेशा यह हौसला दिलाया कि उनकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी। यह अटूट भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा। परिवार के मुखिया रोहित आनंद का कहना है कि बच्चों के दृढ़ संकल्प ने ही उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।

क्षेत्र के छात्रों के लिए बने प्रेरणा

उनके शिक्षक चंदन कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सफलता उन सभी विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा संदेश है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बिहार के कोसी क्षेत्र से कई छात्रों ने NEET परीक्षा पास की है, लेकिन एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों का एक साथ डॉक्टर बनने की राह पर निकलना वाकई में बहुत बड़ी और दुर्लभ उपलब्धि है। उनकी यह कहानी सहरसा जिले के साथ-साथ पूरे राज्य के उन छात्र-छात्राओं के लिए एक मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों के बीच भी अपने डॉक्टर बनने के सपने को साकार करना चाहते हैं।

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