राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच में तेजी
अयोध्या में राम मंदिर से चढ़ावे की चोरी के मामले की जांच अब एक नए चरण में प्रवेश कर गई है। पुलिस ने मामले के मुख्य संदिग्ध माने जा रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उनके भतीजे मनीष यादव को 39 घंटे की पुलिस रिमांड पर लिया है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इस रिमांड अवधि के दौरान इन दोनों से पूछताछ करने पर चोरी के पीछे काम कर रहे पूरे गिरोह और इसमें शामिल अन्य चेहरों का पर्दाफाश हो सकेगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से 6 आरोपियों से पहले ही रिमांड के जरिए पूछताछ पूरी हो चुकी है। अब टिन्नू और मनीष से मिलने वाली जानकारियों को पिछले सुरागों के साथ जोड़कर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
टिन्नू यादव की भूमिका और मास्टरमाइंड होने का शक
जांच में सामने आया है कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के काफी करीबी व्यक्तियों में से एक था। मंदिर प्रबंधन में उसकी पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर में रखे जाने वाले सभी दानपात्रों की चाबियां उसके ही नियंत्रण में रहती थीं और वह उनकी देखरेख का जिम्मा संभालता था। पुलिस की छापेमारी के दौरान उसके आवास से एक लाख रुपये की नकदी बरामद की गई। मनीष यादव, जो टिन्नू का ही भतीजा है, उसे भी टिन्नू की सिफारिश पर ही राम मंदिर में नियुक्त किया गया था। मनीष का काम चढ़ावे की गिनती करना था और उसके घर पर हुई कार्रवाई में पुलिस को दो लाख रुपये नकद मिले। पुलिस सूत्रों का कहना है कि टिन्नू यादव इस पूरे चढ़ावा चोरी के बड़े खेल का मास्टरमाइंड है।
रिमांड के दौरान मिले महत्वपूर्ण सुराग
पुलिस ने इस केस के सिलसिले में पहले भी कई आरोपियों से गहन पूछताछ की है। रिकॉर्ड के अनुसार, अविनाश शुक्ला से 13 घंटे, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे से 40 घंटे की रिमांड में विस्तृत पूछताछ की गई। इसके अतिरिक्त, रमाशंकर मिश्रा और गणना प्रभारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को भी 14 घंटे के लिए पुलिस रिमांड पर रखा गया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन पूछताछ सत्रों से कई ठोस सबूत हाथ लगे हैं। मामले में चोरी की गई नकद राशि के अलावा, उस धन से खरीदी गई गाड़ियां, कीमती जेवर और अन्य संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी पुलिस ने जब्त कर लिए हैं, जो इस घोटाले की गंभीरता को दर्शाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में SIT की रिपोर्ट
इस पूरे मामले की जांच कर रही SIT अब 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश करने की तैयारी में है। हालांकि, रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए SIT ने राज्य सरकार से कुछ अतिरिक्त समय की मांग की है, क्योंकि मामले के कई पहलुओं की गहन पड़ताल अभी बाकी है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि रिपोर्ट जल्द आएगी, लेकिन अब जांच की बारीकियों को देखते हुए इसमें समय लग रहा है। उम्मीद है कि SIT की इस रिपोर्ट में चोरी के तरीके, जिम्मेदार लोगों की संलिप्तता और सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों पर बड़े खुलासे हो सकते हैं। रिपोर्ट के सौंपे जाने के बाद सरकार इसका गहन अध्ययन करेगी और उसके बाद ही कोई बड़ा प्रशासनिक या कानूनी कदम उठाया जाएगा।
मंदिर में प्रायश्चित अनुष्ठान का आयोजन
चढ़ावा चोरी जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की शुद्धि के लिए प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू किया है। बीते शुक्रवार सुबह 11 बजे से मंदिर परिसर में विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में 18 पुजारी और पांच आचार्य शामिल हैं, जो वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक और हवन के जरिए प्रायश्चित कर रहे हैं। यह अनुष्ठान लगातार 10 दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें हर दिन दो बार विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और हवन संपन्न कराया जाएगा। ट्रस्ट का मानना है कि यह घटना व्यवस्था की एक बड़ी चूक है, जिसने करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया है। इस प्रायश्चित का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के खोए हुए विश्वास को पुनः स्थापित करना है।
योगी आदित्यनाथ का बयान और आगे की रणनीति
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। शामली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व इस घटना की आड़ में सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में भगवान राम का नाम लेने वालों पर गोलियां चलाई जाती थीं, लेकिन आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब सभी की निगाहें 22 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर टिकी हैं, जहां मंदिर की सुरक्षा, दानपात्रों की निगरानी और प्रशासनिक सुधारों को लेकर निर्णायक फैसले लिए जाने की संभावना है।
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