शिवपुरी की 'धाकड़ गर्ल' मुस्कान ने 'बैटलग्राउंड्स' में मचाया धमाल, मुंबई के मंच पर चमका मध्य प्रदेश का नाम

शिवपुरी के मझेरा गांव की इंटरनेशनल पावरलिफ्टर मुस्कान शेख खान ने रियलिटी शो 'बैटलग्राउंड्स सीजन 2' में दमदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा। खेल के बाद अब मनोरंजन की दुनिया में भी उन्होंने जिले का नाम रोशन किया है।

आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 'दंगल' का वह मशहूर संवाद — “मारे छोरियां छोरों से कम हैं के?” — मध्य प्रदेश के एक दूरदराज और जंगली इलाके में बसे छोटे से गांव मझेरा (शिवपुरी) की एक बेटी ने हकीकत में सच कर दिखाया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा गर्व से लहराने वाली इंटरनेशनल पावरलिफ्टर मुस्कान शेख खान ने खेल के मैदान के बाद अब मनोरंजन की दुनिया में भी नया मुकाम हासिल किया है।

शिवपुरी की इस बहुप्रतिभाशाली 'धाकड़ गर्ल' ने मायानगरी मुंबई के चमचमाते मंच पर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परचम लहराया है। मुस्कान ने अमेजन और एमएक्स प्लेयर पर प्रसारित होने वाले देश के चर्चित एडवेंचर रियलिटी शो 'बैटलग्राउंड्स सीजन 2' में हिस्सा लेकर अपने जोरदार प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। टीवी स्क्रीन पर अपनी ताकत और सूझबूझ का परिचय देती शिवपुरी की इस बेटी को देखना पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है।

संघर्ष की कहानी, जहां से शुरू हुआ सफर

इस संघर्ष की असली कहानी साल 1997 से शुरू होती है। मुस्कान के पिता मोहम्मद दारा खान खुद एक बेहतरीन बास्केटबॉल खिलाड़ी और नेशनल चैंपियन रह चुके थे। उनका सपना देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने का था। महज 20 वर्ष की उम्र में स्पोर्ट्स कोटे से उनका चयन आईटीबीपी में सब-इंस्पेक्टर के पद पर हो गया था, लेकिन जॉइनिंग से कुछ दिन पहले एक दर्दनाक सड़क हादसे में उनके हाथ की उंगलियां कट गईं।

इस दुर्घटना ने उनके खेल करियर और देश के लिए स्वर्ण जीतने के सपने को बिखेर दिया। मजबूरी में उन्हें गांव लौटकर पोल्ट्री फार्म का कारोबार शुरू करना पड़ा। हालांकि खेल के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उनके पांच बच्चे हैं, जिनमें मंझली बेटी मुस्कान की खेलों में असाधारण रुचि देखकर उन्हें अपने अधूरे सपनों को नया आकार देने की उम्मीद जगी।

रोजाना 40 किलोमीटर का सफर और घर में बनी 'देसी जिम'

बेटी को बेहतर अवसर देने के लिए दारा खान ने उसका दाखिला शिवपुरी के एक निजी स्कूल में करवाया। गांव मझेरा से रोजाना 20 किलोमीटर दूर स्कूल छोड़ने और वापस लाने का जिम्मा उन्होंने खुद उठाया, यानी हर दिन वे 40 किलोमीटर का सफर तय करते थे।

मुस्कान ने साल 2016 में पहली बार राज्य स्तरीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसके बाद 2017, 2018 और 2019 में लगातार तीन बार उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर खेला। मिनी हैंडबॉल में उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहता था कि टीम के 10 गोलों में से अक्सर 9 गोल वही करती थीं। इसके अलावा उन्होंने भाला फेंक और गोला फेंक जैसी प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया।

बाद में पिता को महसूस हुआ कि व्यक्तिगत खेलों में मुस्कान को ज्यादा पहचान मिल सकती है। उन्होंने उसे वेटलिफ्टिंग और पावरलिफ्टिंग की ओर प्रेरित किया और खुद उसके पहले कोच बने। कोरोना काल में जब खेल गतिविधियां बंद हो गईं, तब घर में ही एक देसी जिम तैयार की गई, जहां मुस्कान ने लगातार दो साल तक कड़ा अभ्यास किया।

न्यूजीलैंड में उठाया 282.5 किलो वजन

कोरोना के बाद मुस्कान की मेहनत रंग लाई। उन्होंने जिला, संभाग और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार स्वर्ण पदक जीते। अगस्त 2022 में ऑल इंडिया पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में 2 गोल्ड और 1 सिल्वर जीतने के बाद न्यूजीलैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में उनका चयन हुआ।

ऑकलैंड में हुई इस प्रतियोगिता के 63-64 किलोग्राम सब-जूनियर वर्ग में मुस्कान ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। उन्होंने स्क्वाट में 105 किलोग्राम, बेंच प्रेस में 57.5 किलोग्राम और डेडलिफ्ट में 120 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। तीनों स्पर्धाओं में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद उनका कुल वजन 282.5 किलोग्राम दर्ज हुआ, जो उनके वर्ग में सबसे अधिक था। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर मुस्कान ने 4 स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया।

तीखे खाने की शौकीन, पर अनुशासन में डाइट

मुस्कान के भाई हनी खान बताते हैं कि उन्हें मसालेदार और तीखा खाना बेहद पसंद है। हालांकि एक खिलाड़ी होने के नाते उनकी डाइट काफी सख्त रही है। भाई अक्सर उन्हें पसंदीदा चीजें खाने से रोकता था, जिसे लेकर दोनों के बीच मजाकिया नोकझोंक भी होती थी। लेकिन परिवार ने हमेशा उनकी फिटनेस और अनुशासन को सबसे ऊपर रखा।

ताकत और दिमाग का बेजोड़ संगम

मुस्कान शेख खान केवल पावरलिफ्टिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने कई खेलों में अपनी प्रतिभा साबित की है:

  • पावरलिफ्टिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4 स्वर्ण पदक
  • हैंडबॉल में तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अनुभव
  • पिस्टल शूटिंग में राष्ट्रीय स्तर पर पदक
  • शतरंज में राज्य स्तरीय चैंपियनशिप जीतकर बौद्धिक क्षमता का परिचय

आज मुस्कान शेख खान सिर्फ शिवपुरी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सीमित संसाधन, कठिन हालात और असफलताएं भी उस इंसान का रास्ता नहीं रोक सकतीं, जिसके पास मजबूत इरादे, परिवार का साथ और कुछ बड़ा कर दिखाने का जुनून हो।

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