उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव
धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। सावन और भादौ के पवित्र महीनों में मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसे देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने संध्या और शयन आरती की दर्शन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा महाकाल की आरती का लाभ उठा सकें और उन्हें निराश न लौटना पड़े।
अब बिना बुकिंग के भी मिलेंगे आरती के दर्शन
अब तक मंदिर में संध्या और शयन आरती में शामिल होने के लिए बुकिंग की व्यवस्था अनिवार्य थी, जिसके कारण बहुत ही सीमित संख्या में भक्तों को प्रवेश मिल पाता था। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1200 श्रद्धालु ही गणेश मंडपम में बैठकर पूरी आरती का आनंद ले पाते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत, मंदिर प्रशासन ने उन श्रद्धालुओं के लिए भी रास्ता खोल दिया है जिन्हें किसी कारणवश आरती की अग्रिम बुकिंग नहीं मिल पाती है। ये भक्त अब कार्तिक मंडपम से चलित दर्शन व्यवस्था के माध्यम से आरती का पुण्य लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
कार्तिक मंडपम का किया जाएगा बेहतर उपयोग
मंदिर प्रशासन की योजना के अनुसार, कार्तिक मंडपम को अब उसकी अधिकतम क्षमता तक श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। सावन और भादौ के दौरान जब भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, तब यह व्यवस्था विशेष रूप से मददगार साबित होगी। मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था के तहत कार्तिक मंडपम को पूरी तरह से खाली रखा जाएगा ताकि वहां अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालु आरती के दौरान चलित दर्शन कर सकें। हालांकि, इस दौरान कार्तिक मंडपम में श्रद्धालुओं को रुकने की अनुमति नहीं दी जाएगी, ताकि दर्शन का क्रम निरंतर चलता रहे और भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।
सुरक्षित और सुगम दर्शन पर जोर
मंदिर समिति का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित दर्शन का अनुभव प्रदान करना है। सावन और भादौ में देशभर से लाखों भक्त बाबा महाकाल के दर्शन करने उज्जैन पहुंचते हैं। हर भक्त की यह हार्दिक इच्छा होती है कि उन्हें महाकाल की दिव्य संध्या और शयन आरती को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिले। मंदिर समिति ने इसी भावना का सम्मान करते हुए दर्शन व्यवस्था को इस प्रकार तैयार किया है कि सामान्य भक्तों को भी आरती का लाभ मिल सके।
मौजूदा व्यवस्था में क्या नहीं बदलेगा?
मंदिर प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि दर्शन की पुरानी व्यवस्था पूरी तरह से बंद नहीं की जा रही है। जो श्रद्धालु पहले से बुकिंग करवाएंगे और जो प्रोटोकॉल के अंतर्गत आने वाले भक्त हैं, उनके लिए व्यवस्था पहले की तरह ही बनी रहेगी। उनके दर्शन में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। मंदिर समिति का यह निर्णय बढ़ती हुई भीड़ के बीच सामान्य श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है, जिससे वे बिना किसी परेशानी के बाबा महाकाल के दर्शन कर पाएंगे।
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