बिहार में डिजिटल शिक्षा की नई क्रांति: 'बिहार स्कूल लाइव क्लासेस' की शुरुआत, सरकारी स्कूलों के बच्चे मुफ्त में करेंगे JEE और NEET की तैयारी

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में 'बिहार स्कूल लाइव क्लासेस' योजना का उद्घाटन किया है। इसके तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को मुफ्त डिजिटल शिक्षा और JEE, NEET व CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष कोचिंग मिलेगी।

बिहार सरकार ने राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक बनाने और डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राजधानी पटना में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'बिहार स्कूल लाइव क्लासेस' योजना का विधिवत उद्घाटन किया। इस खास मौके पर राज्य के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी के साथ शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को भी बड़े निजी शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर आधुनिक, तकनीकी और उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

इस डिजिटल पहल के जरिए गरीब और ग्रामीण परिवेश से आने वाले होनहार बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर और समान अवसर मिलेंगे। अब सरकारी स्कूलों के बच्चे न सिर्फ अपनी बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे, बल्कि देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी अपने स्कूल परिसर से ही बिल्कुल मुफ्त में कर पाएंगे। यह योजना राज्य के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने का माद्दा रखती है।

बिहार स्कूल लाइव क्लासेस योजना की 10 बड़ी बातें

इस नई डिजिटल शिक्षा प्रणाली और मुफ्त कोचिंग व्यवस्था से जुड़ी मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं:

  • योजना की शुरुआत: बिहार सरकार ने सरकारी शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए पटना के 150 सरकारी स्कूलों से 'बिहार स्कूल लाइव क्लासेस' कार्यक्रम का आगाज़ किया है।
  • इन कक्षाओं के छात्रों को मिलेगा लाभ: इस डिजिटल शिक्षा योजना के तहत मुख्य रूप से कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए लाइव और इंटरैक्टिव कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
  • विशेषज्ञों से सीधा संवाद: छात्र अब घर या स्कूल से विशेषज्ञ शिक्षकों के साथ सीधे ऑनलाइन जुड़ सकेंगे। वे लाइव क्लास के दौरान पढ़ाई के साथ-साथ अपनी शंकाओं का तुरंत समाधान भी पा सकेंगे।
  • डिजिटल स्टडी मैटेरियल की सुविधा: विद्यार्थियों की पढ़ाई को आसान बनाने के लिए डिजिटल स्टडी मैटेरियल, विशेष नोट्स, रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर और नियमित रूप से मॉक टेस्ट की बेहतरीन सुविधाएं दी जाएंगी।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी: इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से केवल स्कूली या बोर्ड परीक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षाओं जैसे JEE, NEET और CUET की भी पूरी तैयारी कराई जाएगी।
  • उन्नत पाठ्यक्रम और टेस्ट: विशेषज्ञ शिक्षकों की देखरेख में छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं का पूरा पाठ्यक्रम, अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न और ऑनलाइन टेस्ट सीरीज उपलब्ध कराई जाएगी।
  • उच्च शिक्षा का बड़ा लक्ष्य: बिहार सरकार का मुख्य लक्ष्य यह है कि सरकारी स्कूलों के गरीब बच्चे भी देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों, मेडिकल संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश पा सकें।
  • मुफ्त कोचिंग की सौगात: आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए पटना के 10 चयनित मॉडल स्कूलों में JEE और NEET की पूरी तरह से निःशुल्क कोचिंग सेवा शुरू की गई है।
  • पूरे राज्य में विस्तार की योजना: सरकार आने वाले समय में इस मुफ्त कोचिंग सुविधा का दायरा तेजी से बढ़ाएगी। इसे राज्य के सभी 146 मॉडल स्कूलों तक विस्तारित करने की पुख्ता योजना है।
  • जुलाई अंत तक का लक्ष्य: पटना के 150 स्कूलों से शुरू हुई इस योजना को जुलाई के अंत तक जिले के सभी 422 हाई स्कूलों में लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे बिहार में चलाया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था में तकनीक का समावेश

बिहार के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा तो पहले से ही शुरू की जा चुकी थी, लेकिन अब लाइव कक्षाओं के जरिए इस व्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जाया जा रहा है। डिजिटल तकनीक की मदद से सुदूर ग्रामीण इलाकों में बैठे छात्रों को भी पटना और देश के अन्य बड़े शहरों के अनुभवी शिक्षकों से पढ़ने का मौका मिलेगा। इस व्यवस्था से शिक्षा में होने वाले भौगोलिक अंतर को पाटने में बड़ी मदद मिलेगी।

शिक्षकों और अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल शिक्षा प्रणाली की एक और बड़ी खूबी इसका इंटरैक्टिव होना है। आमतौर पर ऑनलाइन पढ़ाई को एकतरफा माना जाता है, जहां छात्र केवल वीडियो देखते हैं और सीधे सवाल नहीं पूछ पाते। लेकिन इस योजना के तहत तैयार किए गए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में छात्र सीधे अपने शिक्षकों से संवाद कर सकेंगे। कक्षा के दौरान यदि किसी विषय को समझने में कोई कठिनाई आती है, तो छात्र तुरंत अपना सवाल पूछ सकते हैं। इससे उन्हें बिल्कुल वैसा ही अनुभव मिलेगा जैसा किसी वास्तविक ऑफलाइन क्लासरूम में मिलता है। सरकार का यह प्रयास बिहार की पूरी शिक्षा व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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