कैडिला फार्मास्यूटिकल्स की प्रसिद्ध दवा 'एसीलॉक' की बिक्री पर रोक, महाराष्ट्र एफडीए ने जब्त किया ढाई करोड़ का स्टॉक

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पेट दर्द और एसिडिटी के इलाज में काम आने वाली दवा 'एसीलॉक' के कई वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। बिना अनुमति के मिलती-जुलती ब्रांडिंग के साथ दवाएं बेचने के आरोप में ढाई करोड़ रुपये का स्टॉक भी जब्त किया गया है।

अल्सर, एसिडिटी और सीने में जलन जैसी पेट की समस्याओं के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक बेहद लोकप्रिय दवा को लेकर महाराष्ट्र में बड़ी कार्रवाई की गई है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने देश की जानी-मानी दवा निर्माता कंपनी कैडिला फार्मास्यूटिकल्स के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए उसकी एक प्रसिद्ध दवा की बिक्री और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन के चलते प्रशासन ने राज्य भर में बड़े पैमाने पर छापेमारी की है और कंपनी की करोड़ों रुपये मूल्य की दवाओं का भंडार जब्त कर लिया है।

अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई कंपनी द्वारा तय नियमों के विरुद्ध जाकर एक ही नाम से मिलती-जुलती दवाएं बाजार में बेचने और उनकी पैकेजिंग व ब्रांडिंग में समानता रखने के कारण की गई है। प्रशासन को अंदेशा है कि इससे मरीजों और डॉक्टरों के बीच भ्रम फैल सकता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है।

इन दवाओं पर लगी है रोक और जब्त हुआ करोड़ों का स्टॉक

महाराष्ट्र एफडीए की यह बड़ी कार्रवाई मुख्य रूप से कैडिला की प्रसिद्ध दवा ब्रांड 'एसीलॉक' से जुड़ी हुई है। प्रशासन ने जिन दवाओं की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें निम्नलिखित उत्पाद शामिल हैं:

  • एसीलॉक 150
  • एसीलॉक 150 प्लस
  • एसीलॉक 300
  • एसीलॉक 300 प्लस

इन दवाओं में सक्रिय औषधीय घटकों (API) के रूप में रैनिटिडीन और फैमोटिडीन का इस्तेमाल किया गया था। एफडीए की जांच में सामने आया कि कंपनी के पास पहले केवल रैनिटिडीन आधारित दवाओं 'एसीलॉक 150' और 'एसीलॉक 300' के निर्माण की ही मंजूरी थी। लेकिन बाद में कंपनी ने बिना उचित प्रशासनिक अनुमति के फैमोटिडीन आधारित दवाओं को भी लगभग एक जैसी ब्रांडिंग के साथ 'एसीलॉक 150 प्लस' और 'एसीलॉक 300 प्लस' नाम से बाजार में उतार दिया। इससे उपभोक्ताओं के लिए सही और गलत दवा की पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया।

एफडीए कमिश्नर का सख्त निर्देश, तत्काल बाजार से वापस ली जाएं दवाएं

महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस गंभीर मामले पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाओं के ब्रांड नाम में किसी भी तरह की समानता होना जनस्वास्थ्य के लिए एक बेहद गंभीर खतरा है। यदि ब्रांड नाम एक जैसे होंगे, तो डॉक्टरों, दवा विक्रेताओं (फार्मासिस्ट) या मरीजों से गलत दवा दिए जाने या खाने की चूक हो सकती है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

इसी खतरे को देखते हुए प्रशासन ने कैडिला फार्मास्यूटिकल्स को कड़ा निर्देश दिया है कि वह इन सभी दवाओं के पूरे उपलब्ध स्टॉक को तुरंत बाजार से वापस (रिकॉल) मंगाए। कमिश्नर ने साफ कर दिया है कि जब तक इस पूरे विवाद और भ्रम की स्थिति का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकल जाता, तक तक राज्य में 'एसीलॉक 150 प्लस' और 'एसीलॉक 300 प्लस' जैसी दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक पूरी तरह जारी रहेगी।

तीन शहरों के गोदामों पर छापेमारी, ढाई करोड़ रुपये की दवाएं जब्त

नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिलने के बाद एफडीए की टीमों ने अत्यंत त्वरित कार्रवाई की। अधिकारियों ने 9 जुलाई और 10 जुलाई को राज्य के विभिन्न हिस्सों में सुनियोजित छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान पुणे, नागपुर और ठाणे जिले के भिवंडी स्थित कंपनी के बड़े वितरण केंद्रों व गोदामों पर छापेमारी की गई।

इस बड़ी कार्रवाई के दौरान एफडीए ने कुल 2,45,37,490 रुपये मूल्य की दवाओं का स्टॉक जब्त कर लिया। प्रशासन ने इन सभी दवाओं के वितरण को रोक दिया है ताकि यह संदेहास्पद दवाएं आम जनता तक न पहुंच सकें।

दिशानिर्देशों के खिलाफ कदम, होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

एफडीए का मानना है कि कंपनी का यह रवैया पूरी तरह से स्थापित नियमों के खिलाफ है। अधिकारियों का कहना है कि किसी दवा के रासायनिक फार्मूले या संरचना को बदलकर, उसे पुराने और लोकप्रिय नाम से मिलती-जुलती ब्रांडिंग के साथ बेचना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। यह कदम देश के औषधि नियमों के खिलाफ है।

इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। एफडीए के अनुसार, जांच के पूरे निष्कर्ष सामने आने के बाद दोषी पाए जाने पर कंपनी के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दवा बाजार में कैडिला की इस कार्रवाई के बाद से अन्य दवा कंपनियों के बीच भी नियमों के पालन को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

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