बिना किसी कोचिंग के सागर के अनुज यादव बने सब इंस्पेक्टर, जानिए सिर्फ 15 दिनों में फिजिकल परीक्षा पास करने का सीक्रेट

सागर जिले के डूंगासरा गांव के 24 वर्षीय अनुज यादव ने बिना किसी महंगी कोचिंग के घर पर खुद से पढ़ाई कर सब इंस्पेक्टर परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल की है।

बिना कोचिंग के तय किया कामयाबी का सफर

मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने साबित कर दिया है कि अगर मन में पक्का इरादा हो तो बिना किसी महंगी कोचिंग के भी बड़ी से बड़ी परीक्षा पास की जा सकती है। सागर जिले के एक छोटे से गांव डूंगासरा के रहने वाले 24 साल के अनुज यादव ने अपने पहले ही प्रयास में पुलिस सब इंस्पेक्टर यानी SI की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। अनुज की इस सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि उन तमाम युवाओं को एक नई राह दिखाई है जो कोचिंग की भारी-भरकम फीस नहीं दे सकते।

5 साल की कड़ी तपस्या और हर दिन 12 घंटे की पढ़ाई

अनुज यादव की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। इसके पीछे उनकी 5 साल की कड़ी मेहनत और अटूट अनुशासन छिपा हुआ है। अनुज ने कोरोना काल के दौरान मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की तैयारी शुरू की थी। वह रोजाना करीब 10 से 12 घंटे तक लगातार पढ़ाई करते थे। पढ़ाई को लेकर अनुज का अपना एक खास नियम था। वे हर दिन सुबह उठकर अपने लिए एक लक्ष्य तय करते थे। अनुज का कहना है कि जब तक वह अपने दिनभर के लक्ष्य को पूरा नहीं कर लेते थे, तब तक वे न तो सोते थे और न ही अपनी पढ़ाई बंद करते थे। चाहे उस लक्ष्य को हासिल करने में उन्हें 5 घंटे लगें या फिर 15 घंटे, वह बिना पूरा किए आराम नहीं करते थे।

सेल्फ स्टडी का सीक्रेट फॉर्मूला

अपनी तैयारी की रणनीति को साझा करते हुए अनुज ने बताया कि उन्होंने कभी किसी महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया, बल्कि घर पर रहकर ही खुद से पढ़ाई की। अपनी तैयारी को परखने के लिए वह नियमित रूप से ऑनलाइन टेस्ट दिया करते थे। इस टेस्ट के जरिए उन्हें अपनी कमजोरियों का पता चलता था और वे समय रहते उनमें सुधार कर पाते थे। इसके अलावा, अनुज का एक और नियम था कि वे सप्ताह भर जो कुछ भी पढ़ते थे, उसका वीकली रिवीजन जरूर करते थे ताकि पुरानी पढ़ी हुई बातें दिमाग में बनी रहें। अनुज ने इससे पहले दो बार MPPSC की परीक्षा भी दी थी, लेकिन उसमें उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और साल 2025 में आई सब इंस्पेक्टर की भर्ती परीक्षा में पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। अपनी इस कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने OBC वर्ग में 20वीं रैंक हासिल की और जिला पुलिस बल में अपनी जगह पक्की कर ली।

केवल 15 दिनों की तैयारी में निकाला फिजिकल टेस्ट

लिखित परीक्षा की तैयारी जहां अनुज पिछले 5 सालों से कर रहे थे, वहीं शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी फिजिकल टेस्ट की तैयारी के लिए उनके पास बेहद कम समय था। मुख्य परीक्षा (मेंस एग्जाम) खत्म होने के महज 10 दिन बाद ही फिजिकल टेस्ट की तारीख घोषित कर दी गई थी। ऐसे में अनुज के पास तैयारी के लिए सिर्फ 15 दिन का वक्त बचा था। इस चुनौती से निपटने के लिए अनुज ने सागर की पटेल फिजिकल एकेडमी में दाखिला लिया। वहां के कोच राहुल पटेल ने अनुज को बहुत कम समय में दौड़ने, गोला फेंकने और लंबी कूद की सटीक तकनीक सिखाई। इसी बेहतरीन मार्गदर्शन और तकनीक की बदौलत अनुज ने फिजिकल टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 45 अंक हासिल किए, जबकि इस परीक्षा को पास करने के लिए न्यूनतम अंक केवल 30 तय किए गए थे।

6 महीने में पूरी हुई त्वरित भर्ती प्रक्रिया

अनुज मध्य प्रदेश सरकार की इस त्वरित भर्ती प्रक्रिया से बेहद खुश और संतुष्ट नजर आए। उन्होंने बताया कि सब इंस्पेक्टर की यह पूरी भर्ती प्रक्रिया महज 6 महीने के भीतर पूरी कर ली गई। भर्ती का विज्ञापन जारी होने से लेकर अंतिम परिणाम घोषित होने तक का सारा काम इतनी तेजी से होना सच में काबिले तारीफ है। इस तरह की पारदर्शी और तेज प्रक्रिया से युवाओं का मनोबल बढ़ता है और उनका सरकारी व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होता है। अनुज के पिता शिवराज यादव डूंगासरा गांव के सरपंच हैं। बेटे की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे परिवार और गांव में जश्न का माहौल है।

असफल युवाओं के लिए अनुज का प्रेरक संदेश

अपनी इस शानदार कामयाबी पर बात करते हुए अनुज ने कहा कि अगर कोई भी सफलता बहुत आसानी से मिल जाए, तो उसका असली आनंद महसूस नहीं होता। बार-बार मिलने वाली असफलताओं के बाद जो जीत हासिल होती है, उसका स्वाद बेहद खास और अलग होता है। उन्होंने परीक्षा में असफल होने वाले युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि:

असफलता से निराश होकर घर बैठने या उम्मीद खोने के बजाय युवाओं को अपनी कमियों को पहचानना चाहिए और उनमें सुधार करना चाहिए। जब कोई युवा अपने जीवन में सफल होता है, तो उसके माता-पिता के चेहरे पर जो सुकून और खुशी दिखाई देती है, उसे दुनिया की किसी भी दौलत या करोड़ों रुपयों से नहीं खरीदा जा सकता। इसलिए जब तक मंजिल न मिल जाए, तब तक बिना थके लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

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