पिता के निधन से नहीं डिगे कदम, झुमरी तिलैया के सगलदीप सिंह ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट डॉक्टर बनकर किया नाम रोशन

झुमरी तिलैया के रहने वाले सगलदीप सिंह ने विपरीत परिस्थितियों और पिता के साये के बिना भी अपने हौसले को टूटने नहीं दिया और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया।

कठिन संघर्ष और सफलता की कहानी

झुमरी तिलैया शहर के गुरुद्वारा रोड के निवासी सगलदीप सिंह ने एक बेहद प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। सगलदीप ने अपने दिवंगत पिता के सपने को हकीकत में बदलते हुए भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट डॉक्टर के पद पर कमीशन प्राप्त किया है। देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में से एक, आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे से उन्होंने एमबीबीएस की अपनी शिक्षा पूरी की। हाल ही में पुणे में आयोजित एक गौरवशाली पासिंग आउट परेड के दौरान उन्हें भारतीय सेना के मेडिकल अधिकारी के रूप में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया। अब वे हरियाणा के अंबाला कैंट में एक वर्ष की अपनी अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करेंगे, जिसके बाद वे पूरी तरह से सेना में अपनी सेवाएं देना शुरू कर देंगे।

पिता का अधूरा सपना और दृढ़ संकल्प

सगलदीप सिंह दिवंगत अशोक सलूजा और उनकी पत्नी कमलेश सलूजा के सुपुत्र हैं। सगलदीप के चाचा यशपाल सिंह गोल्डन ने बताया कि अशोक सलूजा की दिली ख्वाहिश थी कि उनका बेटा एक डॉक्टर बने और पूरे समर्पण के साथ देश और समाज की सेवा करे। अपनी स्कूली शिक्षा की शुरुआत सगलदीप ने सेक्रेड हार्ट स्कूल से की थी, जिसके बाद उन्होंने तिलैया डैम स्थित ग्रिजली विद्यालय से अपनी 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात उन्होंने घर पर रहकर ही अत्यधिक अनुशासन और मेहनत के साथ नीट (NEET) की तैयारी करने का निर्णय लिया। हालांकि, इसी दौरान साल 2018 में उनके पिता का अचानक देहांत हो गया। यह सगलदीप के जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण और भावनात्मक रूप से तोड़ देने वाला समय था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय इसी दुख को अपनी ताकत बनाया और पिता के सपने को पूरा करने का दृढ़ निश्चय लिया।

नीट में शानदार प्रदर्शन और एएफएमसी में चयन

पिता के निधन के बाद सगलदीप ने खुद से वादा किया कि चाहे हालात कितने भी प्रतिकूल क्यों न हों, वे अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करके रहेंगे। उन्होंने दिन-रात एक कर मेहनत की और आखिरकार साल 2021 में आयोजित नीट (NEET) परीक्षा में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तर पर 34वां स्थान हासिल किया। इस बेहतरीन उपलब्धि ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त किया।

इंटरव्यू में अधिकारियों को किया प्रभावित

सगलदीप के चयन के दौरान एक महत्वपूर्ण पड़ाव उनका इंटरव्यू था। चयन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने उनसे एक विशेष प्रश्न पूछा कि उन्होंने किसी बड़े सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज के स्थान पर सेना की मेडिकल सेवा को ही अपना करियर क्यों चुना, जबकि उनकी रैंक बहुत बेहतर थी। इस पर सगलदीप ने जो जवाब दिया उसने बोर्ड के अधिकारियों का दिल जीत लिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे एमबीबीएस की पढ़ाई केवल पैसा कमाने के लिए नहीं करना चाहते, बल्कि उन सैनिकों की सेवा करना चाहते हैं जो निस्वार्थ भाव से देश की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपनी कुशलता से उन योद्धाओं की मदद करना चाहता हूं, जो अपनी जान की परवाह किए बिना सीमाओं पर डटे रहते हैं। उनकी यह सोच और देशभक्ति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ही उन्हें भारतीय सेना की मेडिकल कॉर्प्स तक खींच लाई।

गौरव का क्षण

बीते 10 जुलाई को पुणे में आयोजित पासिंग आउट परेड का दृश्य सगलदीप के परिवार के लिए अत्यंत भावुक करने वाला था। जब सगलदीप ने भारतीय सेना के अधिकारी के रूप में शपथ ली और लेफ्टिनेंट डॉक्टर के रूप में कमीशन प्राप्त किया, तो उनका पूरा परिवार गर्व से भर गया। उनके परिजनों का मानना है कि आज सगलदीप ने न केवल अपना लक्ष्य हासिल किया है, बल्कि उनके पिता की आत्मा को भी सच्ची श्रद्धांजलि दी है। अब पूरा झुमरी तिलैया उनके इस कारनामे पर गर्व महसूस कर रहा है।

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